Tibetan Protest: तीन दिवसीय भारत दौरे पर आये चीन के विदेश मंत्री वांग यी का मंगलवार को तिब्बती युवा कांग्रेस के सदस्यों ने (Tibetan Youth Congress) ने जमकर विरोध किया. तिब्बती लोगों ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस के पास चीन के विदेश मंत्री का विरोध करते हुए जमकर नारेबाजी भी की और उनसे तिब्बत के मसले पर पहले बात करने की मांग की. वहीं तिब्बती युवा कांग्रेस के इस प्रदर्शन को जब पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारी जमीन पर लेट गए और नारेबाजी करते रहे.
सोमवार को भी तिब्बती मूल के लोगों ने दिल्ली में चीन के विदेश मंत्री वांग का विरोध करते हुए जमकर प्रदर्शन किया था. जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर थाने भेज दी थी. प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में “तिब्बत फर्स्ट” के पोस्टर भी थे.
#WATCH | Delhi | Members of the Tibetan Youth Congress hold a protest against the visit of China’s Foreign Minister Wang Yi to India, near Hyderabad House, in Delhi. The protestors are detained by Police. pic.twitter.com/UKlgKWKM37
— ANI (@ANI) August 19, 2025
बता दें कि, चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आये हैं. चीन के विदेश मंत्री के भारत दौरे का मुख्य उद्वेश्य भारत और चीन के बीच गहरी हो चुकी संबंधों की खाई को पाट कर राजनीतिक विश्वास और सहयोग को बढ़ाना है.
क्यों तिब्बती करते हैं चीन का विरोध?
दरअसल चीन ने 1951 मं तिब्बत के साथ एक 17 सूत्री समझौता किया था. जिसमें उसने तिब्बत के लिए स्वायत्तता का वादा किया था, लेकिन चीन ने इस समझौते का उल्लंघन कर तिब्बत को अपने अधीन लेने के लिए सेना भेज दी. जिसकी वजह से तिब्बती लोगों का चीन से भरोसा टूट गया और वो विरोध प्रदर्शन करने लगे.
17 मार्च 1959 को दलाईलामा ने छोड़ दिया था तिब्बत
10 मार्च 1959 को तिब्बतियों ने दलाईलामा के निवास स्थान नोरबुलिंगका पैलेस पर चीन ने हमला कर दिया. जिसके बाद 17 मार्च 1959 को अंधेरे में दलाईलामा ने तिब्बती सेना की वर्दी पहनकर नोरबुलिंगका पैलेस छोड़कर अपने कुछ सहयोगियों के साथ भारत की यात्रा पर निकल गए. उनके साथ वरिष्ठ कैबिनेट सदस्य, परिवार के लोग और उनके अंगरक्षक थे.
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रात के अंधेरे में हिमालय को पार कर पहुंचे भारत
उन्होंने रात के अंधेरे में हिमालय के बर्फीले दर्रे को पार किया और विद्रोहियों के कब्जे वाली चौकियों से गुजरते हुए भारत के अरुणाचल प्रदेश पहुंचे. उन्होंने 13 दिनों के बाद 31 मार्च को अरुणाचल प्रदेश के खेंजीमाने दर्रे पर भारत में प्रवेश किया. जहां असम राइफल्स के जवानों ने उनका जबरदस्त स्वागत किया.
चीन के द्वारा जबरदस्ती तिब्बत पर कब्जा किये जाने के विरोध में तिब्बती मूल के लोगों के द्वारा चीन का विरोध किया जाता है.
जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत के दौरे पर पहुंचे तो तिब्बतियों ने हाथों में फ्री तिब्बत और तिब्बत फर्स्ट का पोस्टर लेकर उनका विरोध जताया.
– भारत एक्सप्रेस
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