मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में दिए बयान से बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर भगवान राम ने सिर्फ एक विवाह किया तो फिर रहिम को दो या चार शादियां क्यों करनी चाहिए? उनके इस बयान ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर बहस को और तेज कर दिया है.
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मोहन यादव ने कहा कि देश में एक ही कानून होना चाहिए. हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए अलग‑अलग नियम क्यों हों? उन्होंने सवाल उठाया कि जब राम ने एक ही विवाह किया तो रहिम को कई शादियों की अनुमति क्यों दी जाए?
समान नागरिक संहिता पर जोर
सीएम ने साफ कहा कि भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अलग‑अलग समुदायों के लिए अलग नियम रखना अन्याय है. उनका तर्क था कि विवाह जैसे मुद्दों पर सभी के लिए समान प्रावधान होना चाहिए.
तलाक और बहुविवाह पर टिप्पणी
मोहन यादव ने कहा कि अगर कोई ‘तलाक, तलाक, तलाक’ कहकर पत्नी को छोड़ सकता है तो यह गलत है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में बहुविवाह की परंपरा खत्म होनी चाहिए और सभी को एक ही विवाह तक सीमित रहना चाहिए.
UCC पर सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में काम कर रही है. उनका मानना है कि इससे समाज में न्याय और समानता आएगी. उन्होंने कहा कि अलग‑अलग कानूनों से विवाद और असमानता पैदा होती है.
विपक्ष और समाज की प्रतिक्रिया
इस बयान पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया आना तय है. पहले भी UCC को लेकर कई बार बहस हो चुकी है. मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है, जबकि समर्थक इसे महिलाओं के अधिकारों और समानता के लिए जरूरी मानते हैं.
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मोहन यादव का यह बयान एक बार फिर समान नागरिक संहिता को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है. आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक टकराव और बढ़ सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
(यह खबर सौम्या सिंह द्वारा लिखी गई है. सौम्या सिंह वर्तमान में भारत एक्सप्रेस में इंटर्न है.)
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