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भारतीय नौसेना की महिला शक्ति का जलवे: INS तरिणी की ‘नविका सागर परिक्रमा II’ की ऐतिहासिक वापसी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया स्वागत

भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों, लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए और दिलना के, ने INS तरिणी पर सवार होकर ‘नविका सागर परिक्रमा II’ के तहत दुनिया की समुद्री परिक्रमा पूरी कर इतिहास रच दिया.

Navika Sagar Parikrama 2

भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों ने इतिहास रच दिया है. ‘नविका सागर परिक्रमा II’ अभियान के तहत पूरी दुनिया की समुद्री परिक्रमा सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद INS तरिणी के जरिए लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए और लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के गोवा के तट पर लौट आईं. इस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बनने पहुंचे भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने दोनों अधिकारियों को सलाम किया और इस अद्वितीय साहसिक मिशन की सफलता पर उन्हें बधाई दी.

यह ऐतिहासिक अभियान 2 अक्टूबर 2024 को गोवा स्थित नेवल ओशन सेलिंग नोड से शुरू हुआ था. यह परिक्रमा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसे ‘डबल-हैंडेड मोड’ में पूरा किया गया — यानी इस पूरे समुद्री सफर को सिर्फ दो अधिकारियों ने मिलकर बिना किसी अतिरिक्त क्रू की सहायता के पूरा किया. यह न केवल शारीरिक क्षमता, बल्कि मानसिक दृढ़ता, नेविगेशनल कौशल और अटूट आत्मबल का परिचायक है.

INS तरिणी की वीर यात्रा

‘INS तरिणी’ पर सवार होकर दोनों महिला नौसेना अधिकारी विश्व के प्रमुख महासागरों, कठिन समुद्री परिस्थितियों, तूफानों और हजारों समुद्री मील की यात्रा को पार करते हुए गोवा वापस लौटी हैं. इस दौरान उन्होंने न केवल तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियों का सामना किया, बल्कि भारतीय महिला शक्ति की क्षमता को भी वैश्विक मंच पर सशक्त रूप में प्रस्तुत किया.

स्वागत समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा, “यह परिक्रमा भारत की बेटियों की इच्छाशक्ति और साहस का प्रमाण है. लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा और दिलना ने यह सिद्ध किया है कि भारतीय महिलाएं समंदर की विशालता से भी बड़ी हैं.” उन्होंने नौसेना के इस प्रयास को नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया.

‘नविका सागर परिक्रमा II’ की अहमियत

नविका सागर परिक्रमा II, भारतीय नौसेना की पहल है जो महिला अधिकारियों को समुद्री संचालन के सबसे चुनौतीपूर्ण स्वरूप से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करती है. इस मिशन ने यह दिखा दिया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, चाहे वह धरती हो या समंदर.

इस अभियान की सफलता से प्रेरित होकर भारतीय नौसेना भविष्य में और अधिक महिला अधिकारियों को ऐसी चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में अवसर देने की दिशा में अग्रसर है. ‘तरिणी’ की यह वापसी भारत के समुद्री इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस 



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