कभी-कभी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी भी दिल के खालीपन को नहीं भर पाती. नागपुर में जन्मा एक मासूम बच्चा, जिसे मां ने समाज के डर से अनाथालय में छोड़ दिया था. आज वो नीदरलैंड के हीमस्टेड शहर का मेयर है लेकिन सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी उनके दिल में एक सवाल बाकी है और वो है उसकी असली मां कौन हैं? यही सवाल उन्हें 41 साल बाद फिर भारत खींच लाया है.
क्या है पूरा मामला?
फाल्गुन का जन्म 1985 में नागपुर में हुआ था. जन्म के तीन दिन बाद ही उनकी मां ने उन्हें MSS अनाथ आश्रम में छोड़ दिया. वहां से एक डच दंपत्ति ने उन्हें गोद लिया और वे नीदरलैंड चले गए. वहीं पले-बढ़े और आगे चलकर हीमस्टेड शहर के मेयर बने.
अतीत जानने की ललक
जीवन के इस पड़ाव पर पहुंचकर फाल्गुन के मन में अपनी असली मां को जानने की इच्छा जागी. उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया और अब नागपुर में अपनी मां की तलाश कर रहे हैं. वे शहर-शहर घूमकर लोगों से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कोई उन्हें उनकी मां तक पहुंचा दे या उनके बारे में जानकारी दे सके.
मां ने क्यों छोड़ा?
रिकॉर्ड्स बताते हैं कि जब फाल्गुन का जन्म हुआ तो उनकी मां अविवाहित थीं. समाज के डर और लोकलाज के कारण उन्होंने बच्चे को स्वीकार नहीं किया और आश्रम में छोड़ दिया. इस भावुक कहानी को सुनकर कई लोग इसे महाभारत के कर्ण और कुंती की कथा से जोड़ रहे हैं.
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मदद की अपील
फाल्गुन ने अपनी मां का पता लगाने के लिए NGO, नगर पालिका और पुलिस से भी सहयोग मांगा है. उनका कहना है कि उन्हें लगता है उनकी मां आज भी उन्हें छोड़ने के सदमे में होंगी. वे सिर्फ एक बार उनसे मिलना चाहते हैं और बताना चाहते हैं कि वे खुश हैं और ठीक हैं. फाल्गुन कहते हैं,
“मैं बस उन्हें देखना चाहता हूं और यकीन दिलाना चाहता हूं कि मेरी जिंदगी अच्छी चल रही है.”
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-भारत एक्सप्रेस
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