पहाड़ों की रानी मसूरी का प्रति लोगों का आकर्षण दिनों प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है जिसके कारण इसके पीक सीजन में लाखों की संख्या में लोग मसूरी पहुंच जाते हैं जिससे यहां जबरदस्त जाम की गंभीर समस्या बन जाती है , पर्यटकों के वाहनों से कई कई किलोमीटर जाम लग जाता है , मसूरी में टैक्सी चालक सबल सिंह के अनुसार 2 किलोमीटर तक जाने में 4-4 घंटे तक लग जाते हैं.
इतने जाम के बाद भी पर्यटकों के आने का सिलसिला नहीं थम रहा है.वीकेंड में शनिवार और रविवार को हालत और ज्यादा खराब हो जाती है.
मसूरी में लगातार बढ़ रही है पर्यटकों की संख्या
उत्तराखंड सरकार को भी मसूरी में लाखों पर्यटकों के आने के कारण काफी समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है. अगर आंकड़ों की बात करें तो सन 2022 में 11 लाख से ज्यादा पर्यटक मसूरी आए थे और सन 2024 में यह संख्या बढ़कर 21 लाख हो गई. इसी वर्ष जून 2025 में लंबे जाम के कारण दिल्ली से आए एक पर्यटक की मौत हो गई.
मसूरी प्रवेश के समय दिखाना पड़ेगा QR कोड
उत्तराखंड सरकार भी अब इस जाम को खत्म करने के लिए पीक सीजन में पर्यटकों को मसूरी में प्रवेश करने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने जा रही है, इस रजिस्ट्रेशन के बाद पर्यटकों को एक QR कोड मिलेगा जिसे दिखाने के बाद ही मसूरी में प्रवेश मिल सकेगा. पर्यटन सचिव धीरज सिंह के अनुसार तीन एंट्री प्वाइंट पर इस बार पीक सीजन में कैमरे लगाए जाएंगे. ये एंट्री प्वाइंट हैं क़िमाड़ी, कैंप्टी फॉल और कुथल गेट जिससे मसूरी आने वाले वाहनों का अनुमान लगाया जा सके. पर्यटन सचिव धीरज सिंह के मुताबिक पीक सीजन के अलावा वर्ष के अन्य महीनों में रजिस्ट्रेशन सिस्टम रखने का कोई मतलब नहीं है.
मसूरी आने वाले पर्यटकों के लिए रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
पीक सीजन में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ओटीपी आधारित रहेगा, भारतीय पर्यटकों के मोबाइल पर एक ओटीपी मिलेगा जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए ईमेल के जरिए ओटीपी मिलेगा. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद QR कोड जेनरेट होगा, जिन पर्यटकों के पास QR नहीं होगा उन्हें एंट्री प्वाइंट से वापस भेज दिया जाएगा.
मसूरी को बसाने में कैप्टन फेड्रिक यंग का महत्वपूर्ण योगदान
देहरादून में तैनात कैप्टन फेड्रिक यंग ने 1823 से मसूरी को बसाने का कार्य शुरू किया था जो 1827 में बनकर तैयार हुई. उनका इस जगह ने मन मोह लिया था, फेड्रिक यंग ने मसूरी के लैंडौर में सैनिकों के लिए एक ब्रिटिश मिलिट्री अस्पताल को भी बनाया जिसमें अस्पताल के अलावा चिकित्सकों और नर्स/सिस्टर के लिए रहने के लिए आवास बनाए गए जो अब सिस्टर बाजार के नाम से जाना जाता है, इसके अलावा भी फेड्रिक यंग ने चर्च, ब्रिटिश अधिकारियों के रहने के लिए स्थान बनाए.
पहाड़ों की रानी को बसाने में फेड्रिक यंग का काफी महत्वपूर्ण योगदान है. कैप्टन फेड्रिक यंग 40 वर्षों तक देहरादून और मसूरी में रहे, बाद में वह ब्रिटिश सेवा से रिटायरमेंट के बाद आयर लैंड अपने घर चले गए. लेकिन आज मसूरी में उनका कोई भी स्मारक नहीं है.
भारत एक्सप्रेस
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