नोएडा सेक्टर 107 में हुए घपलों का अब हुआ पर्दाफाश
Real Estate Fraud In Noida: उत्तर प्रदेश की सबसे हाईटेक सिटी नोएडा में आम लोग घर खरीदने के लिए सपने देखते हैं, लेकिन यहां बिल्डर और अथॉरिटी के बीच गहरा गठजोड़ चल रहा है. भारत एक्सप्रेस न्यूज चैनल ने ‘ऑपरेशन – नोएडा के खिलाड़ी’ नाम से एक बड़ा स्टिंग ऑपरेशन किया है.
इस रिपोर्ट में नोएडा सेक्टर 107 के सनवर्ल्ड वनालिका ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का पूरा सच सामने आया है. बिल्डर ने नियम तोड़कर हजारों करोड़ का खेल खेला और अथॉरिटी ने चुप्पी साध ली.
हाउसिंग प्रोजेक्ट की मंजूरी, बिल्डर का गेम
साल 2011 में नोएडा अथॉरिटी ने सनवर्ल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को सेक्टर 107 में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की मंजूरी दी थी. प्रोजेक्ट में 12 आवासीय टावर बनाने थे. टावर 1 से 6 में ग्राउंड फ्लोर के अलावा 18 मंजिलें और टावर 7 से 12 में बेसमेंट के साथ 11 मंजिलें स्वीकृत थीं. साथ ही एक कमर्शियल टावर में दुकानें, ईडब्ल्यूएस फ्लैट और कम्युनिटी हॉल का प्रावधान था.
लेकिन बिल्डर ने इन नियमों की धज्जियां उड़ा दीं. टावर 7 से 9 में 11 की जगह 16 मंजिलें बना दीं. टावर 10 से 12 में 11 की जगह 18 मंजिलें खड़ी कर दीं. कमर्शियल टावर में ईडब्ल्यूएस फ्लैटों की 10 मंजिलों को पूरी तरह हटा दिया और वह जगह खुद हड़प ली. कम्युनिटी हॉल को भी ग्राउंड फ्लोर से ज्यादा मंजिलों तक बढ़ा दिया.
एक्स्ट्रा FAR और अवैध निर्माण का खेल
मूल लेआउट प्लान में 2.75 FAR की अनुमति थी, लेकिन बिल्डर ने 3.60 FAR का इस्तेमाल कर लिया. अथॉरिटी ने कभी एक्स्ट्रा FAR खरीदने का आवेदन नहीं लिया. स्वीकृत क्षेत्र 82497 वर्ग मीटर था, लेकिन बिल्डर ने 108108 वर्ग मीटर तक निर्माण कर दिया. 36 एक्स्ट्रा मंजिलों के लिए 15368 वर्ग मीटर और कम्युनिटी हॉल की 4 अनधिकृत मंजिलों के लिए 2753 वर्ग मीटर जगह का गलत इस्तेमाल हुआ.
यूनिट्स की संख्या भी बढ़ा दी. 720 आवासीय यूनिट्स और 390 सर्वेंट क्वार्टर की जगह 774 यूनिट्स और 474 सर्वेंट क्वार्टर बना दिए. यह स्वीकृत क्षेत्र से 32 प्रतिशत ज्यादा है.
फायर सेफ्टी के नियमों की अनदेखी करना
बिल्डर ने फायर सेफ्टी के नियम भी तोड़े. टावरों के चारों ओर फायर टेंडर के लिए 6 मीटर चौड़ा रास्ता नहीं छोड़ा. बेसमेंट में भी गैरकानूनी अपार्टमेंट बनाए और उन्हें सीढ़ियों से जोड़ दिया. कमर्शियल बिल्डिंग को 90 डिग्री घुमाकर बनाया ताकि दुकानें सड़क की ओर खुलें. टावर 1, 2, 3 के सामने हरित क्षेत्र पर अतिक्रमण कर पार्किंग बना दी. ये सब यूपी इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एक्ट 1976, यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 और नोएडा बिल्डिंग रेगुलेशंस के खिलाफ है.
अघोषित कमाई, रिश्वतकांड का खुलासा
साल 2014 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बिल्डर के ठिकानों पर छापेमारी की. वहां से एक पर्ची मिली जिसमें साफ लिखा था कि एक्स्ट्रा FAR और एक्स्ट्रा मंजिलों की मंजूरी के लिए नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों को 44 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई. कंपनी के डायरेक्टर योगेंद्र कुमार गुप्ता ने इसे स्वीकार भी किया. उन्होंने कहा कि यह रकम अघोषित कमाई से आई थी और अथॉरिटी के भ्रष्ट अफसरों को दी गई ताकि कोई कार्रवाई न हो.
जून 2016 में कुछ खरीदारों ने शिकायत की तो अथॉरिटी ने नोटिस भेजा. लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई. आरोप है कि तत्कालीन सीईओ संजय अग्रवाल और दीपक अग्रवाल भी इसमें शामिल थे. ये दोनों अधिकारी अब केंद्र सरकार में हैं.
खरीदारों का नुकसान, अथॉरिटी की चुप्पी
बिल्डर ने बिना कंपलीशन सर्टिफिकेट के फ्लैट्स की रजिस्ट्री करा दी. खरीदारों को करोड़ों का चूना लगा. प्रोजेक्ट में कई नियम तोड़े गए लेकिन अथॉरिटी ने सिर्फ कागजी नोटिस दिए. हाई कोर्ट ने भी 2016 में निर्माण पर रोक लगाई थी, लेकिन घोटाला जारी रहा.
यह मामला नोएडा में बिल्डर-अथॉरिटी के गठजोड़ का एक बड़ा उदाहरण है. आम लोगों के पैसे से खेल हो रहा है और भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है. भारत एक्सप्रेस की यह जांच बताती है कि जांच और सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि ऐसे घोटाले रुकें.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




