भारत में ऑनलाइन गेमिंग का क्रेज़ पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है. 50 करोड़ से ज्यादा गेमर्स के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग मार्केट बन चुका है. लेकिन इसी के साथ रियल-मनी गेमिंग यानी पैसे लगाकर खेलने वाले ऐप्स ने युवाओं को बर्बादी की राह पर भी धकेला है. अब मोदी सरकार ने इस पर सख्त कदम उठाते हुए Promotion and Regulation of Online Gaming Bill 2025 पास कर दिया है.
इस बिल के तहत अब फैंटेसी क्रिकेट, पोकर, रम्मी और लॉटरी जैसे पैसों वाले गेम्स पूरी तरह बैन कर दिए गए हैं. ये गेम्स युवाओं को जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर कर्ज, मानसिक तनाव और यहां तक कि आत्महत्या तक की स्थिति में पहुंचा रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल 2,000 से ज्यादा आत्महत्याएं गेमिंग से जुड़ी आर्थिक परेशानी के कारण हो रही हैं.
अब नहीं होंगे पैसों के लेन-देन
बिल की माने तो अब कोई बैंक, ऐप या पेमेंट गेटवे इन गेम्स से जुड़े ट्रांजैक्शन प्रोसेस नहीं करेगा. अगर कोई नियम तोड़ता है तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. बार-बार गलती करने वालों को 5 साल की जेल और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना होगा.
बनेगा Online Gaming Authority
इस बदलाव को लागू करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की Online Gaming Authority बनाई जाएगी जो 50 करोड़ रुपये की शुरुआती लागत और 20 करोड़ रुपये सालाना खर्च से काम करेगी. ये संस्था गेम्स की निगरानी करेगी, शिकायतें सुलझाएगी और उम्र के हिसाब से गेम्स को अलग-अलग करेगी.
ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को मिलेगा बढ़ावा
बिल में ई-स्पोर्ट्स को एक वैध खेल के रूप में मान्यता दी गई है. सरकार अब ट्रेनिंग अकादमियां, टूर्नामेंट और स्किल डेवलपमेंट के लिए योजनाएं बनाएगी. शैक्षिक और सामाजिक गेम्स को भी बढ़ावा मिलेगा जिससे युवाओं को मनोरंजन के साथ-साथ सीखने का मौका मिलेगा.
विरोध भी जारी
कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस बैन से 20,000 करोड़ रुपये टैक्स का नुकसान और 2 लाख नौकरियों पर असर पड़ सकता है. लेकिन सरकार का मानना है कि युवाओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य ज्यादा जरूरी है.
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यह बिल भारत को एक सुरक्षित, जिम्मेदार और नवीनता डिजिटल भविष्य की ओर ले जाता है जहां गेमिंग का मतलब होगा स्किल, सीख और सम्मान ना कि लत और नुकसान होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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