OMKARESHWAR BANDH CALL OVER SIMHASTHA 2028: मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ ओंकारेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के दृष्टिगत प्रस्तावित वृहद विकास परियोजनाओं को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच टकराव गहरा गया है. विकास कार्यों के कारण वर्षों से बसे परिवारों, मकान मालिकों, दुकानदारों और किरायेदारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका के बीच सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में संतों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और व्यापारियों ने एकजुट होकर 19 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया और दो टूक चेतावनी दी कि यदि कलेक्टर व प्रशासन ने इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आगामी 19 अक्टूबर 2026 से पूरे नगर को बंद कर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा.
बैठक में श्री जोड़ गणपति हनुमान मंदिर के महंत एवं षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष मंगलदास त्यागी जी महाराज, सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र अग्रवाल, नगर परिषद में विपक्ष के नेता व पार्षद राजेश यादव, कांग्रेस पार्षद चंपाबाई, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष माया बाई और भाजपा जिला अध्यक्ष संतोष वर्मा सहित तमाम पार्षद और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे.
‘विकास का विरोध नहीं, लेकिन आजीविका का संरक्षण जरूरी’
षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष मंगलदास त्यागी जी महाराज ने कहा कि स्थानीय जनता और संत समाज तीर्थ के समग्र विकास के कतई विरोध में नहीं हैं. लेकिन विकास के नाम पर पीढ़ियों से बसे परिवारों और छोटे व्यापारियों को बेघर या बेरोजगार नहीं किया जाना चाहिए. प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी, उसके बाद ही किसी प्रकार का विस्थापन स्वीकार्य होगा.
प्रमुख मांगें: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर मिले लाभ
बैठक में सर्वसम्मति से पारित 19 मांगें:
- काशी विश्वनाथ मॉडल पर मुआवजा: वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर प्रभावित संपत्ति स्वामियों को उनकी परिसंपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर स्वतंत्र व अधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं से निष्पक्ष मूल्यांकन कराकर पर्याप्त मुआवजा दिया जाए.
- रजिस्ट्री व पट्टा धारकों को समान अधिकार: कार्रवाई को केवल ‘अतिक्रमण हटाने’ तक सीमित न किया जाए. रजिस्टर्ड संपत्ति, सरकारी पट्टे के मकानों और दशकों से काबिज लोगों को विस्थापन व पुनर्वास नीति के तहत पूर्ण लाभ मिले.
- टंट्या मामा प्रतिमा के पास भूखंड: विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए ओंकारेश्वर वेलकम गेट स्थित टंट्या मामा प्रतिमा से लेकर गणेश नगर तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर उपलब्ध भूमि पर 60×90 फीट के आवासीय/व्यावसायिक भूखंड मालिकाना हक के साथ आवंटित किए जाएं.
- दुकानदारों और किरायेदारों की सुरक्षा: प्रभावित दुकानदारों को उसी मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में वैकल्पिक दुकानें दी जाएं. जब तक स्थायी कॉम्प्लेक्स न बनें, तब तक अस्थायी दुकानों की व्यवस्था हो ताकि परिवारों का रोजगार न थमे. निजी भूमि पर वर्षों से दुकान चला रहे किरायेदारों को भी नए परिसरों में प्राथमिकता दी जाए.
- पारदर्शिता और समय: प्रभावित लोगों को दस्तावेज जुटाने और सामान स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त व्यावहारिक समय दिया जाए तथा प्रशासन सभी प्रभावितों की सूची, मुआवजे और पुनर्वास की योजना को लिखित में सार्वजनिक करे.
संत समाज और स्थानीय नेताओं ने स्पष्ट किया कि ओंकारेश्वर की पूरी अर्थव्यवस्था तीर्थयात्रियों और स्थानीय छोटे व्यापारियों पर टिकी है. यदि 19 अक्टूबर से पहले प्रशासन ने लिखित में इन मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो नगर के बाजार पूरी तरह बंद रखे जाएंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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