ऑपरेशन सिंदूर पर पूर्व CDS का बड़ा खुलासा
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान के खिलाफ चले ऑपरेशन सिंदूर की परतें खोल दीं. उन्होंने बताया कि इस मिशन में भारतीय सेना ने पहली बार लोइटरिंग मिशन का इस्तेमाल किया जिनका मकसद सरगोधा और उसके आसपास मौजूद रडार सिस्टम की खोज करना था.
किराना हिल्स पर क्या बोले?
चौहान ने कहा कि सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित किराना हिल्स को लेकर कई सवाल उठे. यहां पाकिस्तान की परमाणु सुविधाएं होने की बात कही जाती है. उन्होंने बताया कि संभव है कि एक लोइटरिंग मिशन वहां की पहाड़ी से टकरा गया हो, क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया में उस समय किराना हिल्स से धुआं उठने की तस्वीरें दिखाई गई थीं.
सरगोधा पर हमला करने की अनुमति
पाकिस्तान की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आने के बाद वायुसेना प्रमुख ने सरगोधा पर हमला करने की अनुमति मांगी. चौहान ने मंजूरी देते हुए दो अन्य लक्ष्यों की पहचान करने को कहा. इनमें स्कर्दू शामिल था, लेकिन खराब मौसम के चलते लक्ष्य बदलकर भोलारी करना पड़ा.
ऑपरेशन सिंदूर की खासियत
चौहान ने बताया कि यह ऑपरेशन पहले की कार्रवाइयों से अलग था. इसमें कम ऊंचाई वाले एयरस्पेस का इस्तेमाल किया गया ताकि दुश्मन को प्रतिक्रिया का मौका न मिले और मिशन पूरी तरह सफल हो. उरी हमले के बाद जमीनी सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद एयरस्ट्राइक की गई थी, लेकिन सिंदूर में बिल्कुल नया तरीका अपनाया गया.
तीन चरणों में चला अभियान
उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन एक दिन का नहीं था बल्कि तीन चरणों में चला.
- पहला चरण 6-7 मई को हुआ जिसमें पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई.
- दूसरा चरण 8-9 मई को रहा जिसमें दोनों पक्षों ने ड्रोन का इस्तेमाल कर एक-दूसरे को भ्रमित करने की कोशिश की.
- तीसरे चरण में 10 मई को पाकिस्तान ने हमला किया और भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर में उनकी भूमिका रही. इस पर चौहान ने साफ कहा कि सीजफायर का फैसला दोनों देशों के DGMOs ने किया था. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जानकारी हमारी तरफ से लीक नहीं हुई थी, बल्कि दूसरी ओर से गई होगी.
पाकिस्तान नहीं थी सही जानकारी
चौहान ने बताया कि पाकिस्तान को भारत की सैन्य गतिविधियों की सही जानकारी नहीं थी. समुद्री क्षेत्र में भी उनकी स्थिति कमजोर थी. अरब सागर में भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की लोकेशन को लेकर पाकिस्तान की ब्रीफिंग गलत साबित हुई. असल में भारतीय ग्रुप बताई गई जगह से 100 से 300 नॉटिकल मील दूर था.
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विदेशी स्रोतों पर पाक रहा निर्भरता
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने लॉन्ग रेंज मैरीटाइम एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल नहीं कर पाया और विदेशी स्रोतों पर ही निर्भर रहा. यही वजह थी कि उसकी जानकारी अधूरी और गलत साबित हुई.
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