मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य टकराव आधुनिक युद्ध के इतिहास में एक बड़ा सबक बन गया है. 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को Operation Sindoor लॉन्च किया था. इसके तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक पिनपॉइंट स्ट्राइक की गई.
बोखलाए पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर भारत की पश्चिमी सीमा पर 600 से अधिक ड्रोन्स का एक विशाल ‘ड्रोन स्वार्म’ भेज दिया, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस ग्रिड ने इस हमले को पूरी तरह नाकाम कर दिया.
क्या थी पाकिस्तान की रणनीति?
7 से 9 मई के बीच पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के सैन्य ठिकानों व एयरबेस को निशाना बनाने के लिए लहर-दर-लहर ड्रोन्स दागे. इसमें सस्ते कमर्शियल क्वाडकॉप्टर से लेकर तुर्की में बने सोंगार और यिहा-III जैसे आत्मघाती ड्रोन्स शामिल थे.
पाकिस्तान का मुख्य इरादा भारतीय रडार सिस्टम को भ्रमित करना, महंगी मिसाइलों का स्टॉक खत्म करवाना और भारतीय वायु रक्षा प्रणाली को थकाना था. यह हमला हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से प्रेरित था, जहां सस्ते ड्रोन्स भेजकर महंगी सुरक्षा प्रणालियों को पंगु बनाने की कोशिश की जाती है.
भारत ने ऐसे सिखाया सबक
भारत ने इस हमले को बेअसर करने के लिए अपनी ‘मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस प्रणाली’ का इस्तेमाल किया, जिसमें स्वदेशी ‘आकाशतीर’ नेटवर्क ने रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया.
आकाशतीर भारतीय सेना का स्वदेशी कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है, जो सभी रडार, सेंसर और हथियारों को रियल-टाइम में जोड़ता है. वायुसेना के IACCS नेटवर्क से जुड़े होने के कारण सेना और वायुसेना के बीच जबरदस्त तालमेल देखने को मिला.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) के जरिए दर्जनों ड्रोन्स के नेविगेशन और कंट्रोल लिंक को जाम कर दिया गया, जिससे वे बिना एक भी गोली चलाए हवा में ही दिशा भटककर गिर गए. इसके साथ ही कम ऊंचाई वाले ड्रोन्स को नष्ट करने के लिए L-70, ZU-23 और शिल्का जैसी एंटी-एयरक्राफ्ट गन का इस्तेमाल हुआ, जो बेहद किफायती साबित हुईं. वहीं, अधिक ऊंचाई वाले बड़े खतरों को निशाना बनाने के लिए ‘आकाश’ मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया.
सीमा पर 750 से अधिक मिसाइल सिस्टम और 1,000 से ज्यादा गन सिस्टम तैनात किए गए थे. इस मजबूत सुरक्षा घेरे के कारण पाकिस्तान का एयर डिफेंस ग्रिड तोड़ने का सपना चकनाचूर हो गया और भारत के सभी प्रमुख सैन्य ठिकाने पूरी तरह सुरक्षित रहे.
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-भारत एक्सप्रेस
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