Bharat Express DD Free Dish

पप्पू यादव की रात भारी गुजरी! तबीयत बिगड़ने पर PMCH रेफर, जानें क्या 1995 का केस?

Pappu Yadav News: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को 1995 के केस में पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया. तबीयत बिगड़ने पर उन्हें IGIMS के बाद PMCH शिफ्ट किया गया है. जानिए क्या है पूरा विवाद?

Pappu Yadav Purnia MP Patna Police

पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) को पटना पुलिस ने बीती देर रात उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी का आधार 31 साल पुराना (1995 का) एक मामला है, जिसमें उन पर धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेकर कब्जा करने का आरोप है. गिरफ्तारी से पहले पप्पू यादव के आवास पर हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ. उन्होंने खुद को बीमार बताया और पुलिस अधिकारियों के सिविल ड्रेस में आने पर आपत्ति जताई, लेकिन भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह उन्हें गिरफ्तार कर ले गए.

गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव को मेडिकल जांच के लिए IGIMS ले जाया गया. सांसद के निजी सचिव और सोशल मीडिया अकाउंट के मुताबिक, उन्हें रातभर IGIMS में बेड तक नहीं मिला और उन्हें स्ट्रेचर पर ही रखा गया. सुबह होते ही पुलिस उन्हें IGIMS से PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) लेकर गई है.

क्या है 1995 का मामला? (Pappu Yadav 1995 Case)

यह मामला पटना के गर्दनीबाग थाने में 1995 में दर्ज हुआ था. पप्पू यादव पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी कर एक मकान किराए पर लिया और उसे अपना कार्यालय बना लिया. दो दिन पहले ही पटना की MP-MLA कोर्ट ने इस मामले में पप्पू यादव समेत तीन लोगों के खिलाफ कुर्की-जब्ती का वारंट जारी किया था. सिटी एसपी भानु प्रताप ने कहा कि न्यायालय के आदेश की अवमानना की गई थी, उसी आरोप में गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है.

क्या पुलिस ने खेल किया?

पप्पू यादव के वकील शिवनंदन भारती ने पुलिस की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया है. वकील का कहना है कि पप्पू यादव 1995 के केस में पहले ही बेल ले चुके थे. पुलिस ने जानबूझकर बेल टूटने के बाद के नोटिस (धारा 82) दबा दिए और सीधे कुर्की (धारा 83) का आदेश लेकर आ गई.

ये भी पढ़ें: यमुना एक्सप्रेस-वे पर बिछीं लाशें! टॉयलेट के लिए उतरे यात्रियों को कंटेनर ने रौंदा

अब आगे क्या होगा? (Pappu Yadav Arrested Update)

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पप्पू यादव को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा. उनकी लीगल टीम जमानत के लिए तैयार है. बीमारी का हवाला देकर उन्हें जेल के बजाय अस्पताल में रखने की मांग भी की जा सकती है. अगर कोर्ट बेल दे देती है, तो उन्हें रिहा करना पड़ेगा, वरना उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read