इस बार संसद का शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी जानकारी दी है. किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कहा कि शीतकालीन सत्र रचनात्मक और सार्थक होने की आशा है, जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा.
इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
इस बार शीतकालीन सत्र में सरकार परमाणु उर्जा, उच्च शिक्षा, नए कॉर्पोरेट कानून समेत 10 विधेयक पास करने की तैयारी में है. 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे हाने पर भी चर्चा हो सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) पहले ही कह चुके हैं कि 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम की कई लाइनें हटा दी थीं, इसी वजह से विभाजन की नींव पड़ी.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 1 दिसंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. एक रचनात्मक और सार्थक सत्र की आशा है जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करे और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करे.”
SIR का विरोध करेगी विपक्ष
वहीं दूसरी और विपक्ष की पार्टी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध कर सकती है. तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूचियों का विरोध का फैसला किया है. इस पहले भी मान मानसून सत्र में SIR के विरोध को लेकर संसद में प्रदर्शन किया गया था, जिससे सत्र की कार्यवाही पर असर हुआ था.
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मानूसन सत्र में केवल 37 घंटे की चर्चा
संसद का मानसून सत्र पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया था. मानसून सत्र में चर्चा के लिए कुल 120 घंटे का समय निर्धारित था, लेकिन हंगामे की वजह से लोकसभा में महज 37 घंटे ही चर्चा हुई थी. वहीं, राज्यसभा में केवल 38.88 फीसदी कामकाज हो सका था. मानसून सत्र में अधिक समय नारेबाजी और हंगामे की भेंट चढ़ गया था. राज्यसभा में मानसून सत्र की कुल कार्यवाही 41 घंटे 15 मिनट चली थी. इस अवधि की उत्पादकता केवल 38.88 प्रतिशत रही थी.
-भारत एक्सप्रेस
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