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‘शांति और करुणा ही असली रास्ता’: बुद्ध पूर्णिमा पर प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से किया खास संकल्प का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अष्टांगिक मार्ग की महत्ता पर जोर दिया है. उन्होंने एक विशेष संस्कृत श्लोक और एनीमेशन वीडियो साझा कर भगवान बुद्ध की शांति और करुणा की शिक्षाओं को अपनाने का संदेश दिया.

Buddha Purnima 2026 PM Modi greets nation, shares Ashtangika Marga message

आज पूरा देश और दुनिया भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण के पावन उत्सव ‘बुद्ध पूर्णिमा’ के रंग में डूबी हुई है. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों को बधाई देते हुए भगवान बुद्ध के बताए शांति, करुणा और सद्भावना के मार्ग पर चलने का आह्वान किया है. पीएम मोदी ने अपील की है कि आज के दिन हम सभी को बुद्ध के महान जीवन मूल्यों को अपने भीतर उतारने का संकल्प लेना चाहिए.

संस्कृत श्लोक के जरिए बताया परम शांति का रहस्य

प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में न केवल शुभकामनाएं दीं, बल्कि बौद्ध दर्शन की गहराई को एक प्राचीन संस्कृत श्लोक के माध्यम से साझा किया. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि सभी देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की असीम शुभकामनाएं. शांति, करुणा और सद्भावना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले इस पावन अवसर पर आइए, भगवान बुद्ध के जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प दोहराएं.

इसी के साथ पीएम मोदी ने आखिर में एक श्लोक लिखा:

नान्तर्बहिश्च लोकेषु त्वात्मानं दृष्टवान् क्वचित् ।
आष्टाङ्गिकेन मार्गेण परमां शान्तिमाययौ ।।

क्या है श्लोक का अर्थ?

इस श्लोक का सार समझाते हुए बताया गया कि भगवान बुद्ध ने संसार के भीतर या बाहर कहीं भी स्थायी आत्मा को नहीं देखा (अनात्मवाद) और केवल अष्टांगिक मार्ग (जैसे सम्यक दृष्टि, सम्यक कर्म और सम्यक समाधि) का अनुसरण करके ही परम शांति प्राप्त की. ये आज के भागदौड़ भरे जीवन में दुखों से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त करने का एक बड़ा सूत्र है.

एनीमेशन और प्रकृति का संगम

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पोस्ट में एक एनिमेटेड वीडियो भी साझा किया. इस वीडियो में प्रकृति के शांत दृश्य, कमल के दीपक और बुद्ध की छवि को दिखाया गया है, जो ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक हैं.इसमें साझा किए गए श्लोक को हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत- तीनों भाषाओं में समझाया गया है, ताकि नई पीढ़ी भी बुद्ध की शिक्षाओं को आसानी से समझ सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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