भारतीय रेल को हमारे देश की लाइफलाइन कहा जाता है. हम में से शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने ट्रेन के सफर का आनंद न लिया हो. लेकिन अक्सर ट्रैक पर भीड़ और ट्रेनों की लेटलतीफी हमारे सफर के मजे को किरकिरा कर देती है. इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बहुत बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है. सरकार ने देश के 6 राज्यों में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन बड़े ‘मल्टी-ट्रैकिंग’ प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है.
6 राज्यों के 19 जिलों की बदलेगी तस्वीर
कैबिनेट ने करीब 23,437 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. ये प्रोजेक्ट्स मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों से होकर गुजरेंगे.
Boosting India’s infrastructure, furthering economic growth!
The Cabinet’s approval for railways projects covering 19 Districts across Madhya Pradesh, Rajasthan, Uttar Pradesh, Karnataka, Andhra Pradesh and Telangana will enhance connectivity and improve operational efficiency.…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 6, 2026
सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स को 2030-31 तक पूरा कर लिया जाए. इन योजनाओं के तहत भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की नई लाइनें जोड़ी जाएंगी.
ये हैं वो तीन प्रमुख रूट जहां बिछेंगी नई लाइनें:
- नागदा- मथुरा: यहां तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी.
- गुंतकल- वाडी: इस रूट पर भी तीसरी और चौथी लाइन का विस्तार होगा.
- बुढ़वल- सीतापुर: यहां भी तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी.
पर्यटन और तीर्थयात्रा होगी सुगम
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो घूमने-फिरने और तीर्थयात्रा के शौकीन हैं. इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों और मंदिरों तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
- भक्त अब महाकालेश्वर, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम और नैमिषारण्य (नीमसार) जैसे पवित्र स्थानों की यात्रा कम समय में पूरी कर सकेंगे.
- वन्यजीव प्रेमियों के लिए रणथंभौर, कूनो और केवलादेव नेशनल पार्क जाना अब और भी सुविधाजनक होगा.
आम आदमी और पर्यावरण को क्या मिलेगा?
यह सिर्फ पटरियां बिछाने का काम नहीं है, बल्कि यह 83 लाख की आबादी वाले लगभग 4,161 गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने की एक कोशिश है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक क्रांतिकारी कदम है. रेलवे को परिवहन का सबसे ‘ईको-फ्रेंडली’ तरीका माना जाता है. इन प्रोजेक्ट्स से:
- सालाना करीब 37 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आएगी.
- 185 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन (CO2) कम होगा, जो 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है.
साफ है कि आने वाले कुछ सालों में आपका रेल सफर न सिर्फ तेज और आरामदायक होगा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को भी एक नई मजबूती देगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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