PM Modi CCS Meeting On Middle East Crisis: पीएम मोदी की अध्यक्षता में रविवार देर रात उनके आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक हुई. करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में पश्चिम एशिया (West Asia) के मौजूदा सुरक्षा हालातों, विशेष रूप से ईरान-इजरायल युद्ध और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई.
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि
बैठक का मुख्य केंद्र खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रह रहे लगभग 90 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा रहा. सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं. ज़रूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए ‘इमरजेंसी रेस्क्यू प्लान’ पर भी चर्चा की गई. दुबई और दोहा जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे सैकड़ों भारतीय यात्रियों और वहां परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की कठिनाइयों पर भी चिंता व्यक्त की गई.
ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग रूट्स पर संकट
युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया गया. ईरानी अधिकारियों द्वारा इस प्रमुख मार्ग को बंद करने की धमकियों के बीच, भारतीय तेल वाहक जहाजों की सुरक्षा और तेल की कीमतों में संभावित उछाल पर गहन मंथन हुआ. क्षेत्र से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित रास्तों की संभावनाओं पर भी विशेषज्ञों ने अपनी राय दी.
बैठक में मौजूद रहे रणनीतिक दिग्गज
यह बैठक प्रधानमंत्री के राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो दिवसीय दौरे से लौटने के तुरंत बाद बुलाई गई थी. इसमें सुरक्षा और रणनीतिक मामलों के सभी प्रमुख नेता शामिल थे.
- राजनाथ सिंह (रक्षा मंत्री)
- अमित शाह (गृह मंत्री)
- एस जयशंकर (विदेश मंत्री)
- निर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री)
- अजीत डोभाल (NSA)
- जनरल अनिल चौहान (CDS)
खामेनेई की मौत के बाद बदलती भू-राजनीति
बैठक के दौरान सुरक्षा समिति को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उत्पन्न हुई अस्थिरता के बारे में जानकारी दी गई. 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त ऑपरेशन के बाद उपजे तनाव को लेकर प्रधानमंत्री ने बेंजामिन नेतन्याहू और UAE के राष्ट्रपति से फोन पर बात कर भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जोर दिया है.
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भारत का कूटनीतिक रुख
भारत ने इस पूरे संकट पर संतुलित रुख बनाए रखा है. सीसीएस ने स्पष्ट संदेश दिया कि शत्रुता को शीघ्र समाप्त कर सभी पक्षों को डी-एस्केलेशन की ओर बढ़ना चाहिए. सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी है. विदेश मंत्रालय और दूतावासों ने हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की मदद की जा सके.
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