भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान उन्हें वहां के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया. इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक दौरे के 12 प्रमुख नतीजे सामने आए हैं, जो दोनों देशों के भविष्य की रूपरेखा तय करेंगे.
भारत और नॉर्वे के बीच हुए प्रमुख समझौते और नतीजे
ग्रीन रणनीतिक साझेदारी: भारत-नॉर्वे संबंधों को ‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाने पर सहमति बनी है. इसके तहत क्लाइमेट एक्शन, ग्रीन इंडस्ट्री, सर्कुलर इकॉनमी और क्लाइमेट फाइनेंसिंग के जरिए ग्रीन ट्रांजिशन को आगे बढ़ाया जाएगा. यह साझेदारी नॉर्वे की तकनीक और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को जोड़ेगी.
हिंद-प्रशांत महासागर पहल में नॉर्वे की एंट्री: नॉर्वे अब इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल हो गया है. इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और शांतिपूर्ण बनाने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी.
नॉर शिपिंग 2027 में भारत की भागीदारी: इंडिया पवेलियन के साथ ‘नॉर शिपिंग 2027’ में भारत हिस्सा लेगा. इससे ब्लू इकॉनमी, शिपबिल्डिंग, ग्रीन शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्ञान का आदान-प्रदान होगा.
डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप: भारत और नॉर्वे के बीच डिजिटल पब्लिक गुड्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर सहयोग के लिए एक नया फ्रेमवर्क बनेगा. यह डिजिटल इंडिया मिशन को ग्लोबल साउथ देशों तक ले जाने में मदद करेगा.
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग: चिकित्सा और अनुसंधान संस्थानों के बीच ज्ञान साझा करने और संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए मेडिकल क्षेत्र में अहम समझौता हुआ है.
सुरंग निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों और हाइवे के लिए सुरंगों के कंस्ट्रक्शन, स्लोप स्टेबिलिटी (ढलान स्थिरता) और जियोटेक्निकल प्रोजेक्ट्स पर स्पेशलाइज्ड कंसल्टेंसी के लिए करार हुआ है. इसमें सेफ्टी ऑडिट और जॉइंट बिडिंग भी शामिल है.
तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग: क्लीन एनर्जी, क्लाइमेट एक्शन, हेल्थकेयर और ब्लू इकॉनमी में जॉइंट रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के एक्सचेंज में मदद मिलेगी.
CSIR और SINTEF (नॉर्वे) के बीच करार: इस समझौते से बायो-बेस्ड मटीरियल्स, ओशन एनर्जी और कार्बन कैप्चर जैसे सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और सर्कुलर इकॉनमी में इनोवेशन को गति मिलेगी.
ओशन एनर्जी प्रोग्राम: ऑफशोर विंड और वेव एनर्जी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट स्पेसिफिक एग्रीमेंट हुआ है. इससे डीप-वॉटर रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट इनोवेशन को समर्थन मिलेगा.
साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन (ग्रीन शिफ्ट): छात्रों, रिसर्चरों और फैकल्टी की मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि विज्ञान, तकनीक और सस्टेनेबिलिटी पर संयुक्त रिसर्च को मजबूती मिले.
जियोसाइंस पर CSIR-NGRI और एमरल्ड जियोमॉडलिंग का समझौता: इसके तहत जियोसाइंस और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में कोलैबोरेशन होगा, जिससे एडवांस्ड जियोसाइंटिफिक सॉल्यूशंस के जरिए बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे.
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