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शास्त्रों के सार से मिटेगा परीक्षा का डर: पीएम मोदी ने छात्रों को दिया सफलता का श्लोक

बोर्ड परीक्षाओं के तनाव को ‘धर्म और कर्म’ के संगम से दूर करने के लिए पीएम मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में सफलता का आध्यात्मिक मार्ग दिखाया है. एक प्राचीन संस्कृत श्लोक साझा करते हुए पीएम ने बताया कि कैसे विद्या, विवेक और कर्मशीलता के ‘षड्गुणों’ से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है.

PM Modi Tweet on Pariksha Pe Charcha

जैसे-जैसे बोर्ड परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आती है, घर का माहौल किसी जंग के मैदान जैसा लगने लगता है. किताबों का ढेर, नंबरों की होड़ और भविष्य की चिंता छात्रों के मन को अशांत कर देती है. ऐसे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ‘परीक्षा पे चर्चा’ (PPC 2026) के जरिए छात्रों का हाथ थामा है. लेकिन इस बार उनका अंदाज़ थोड़ा अलग और गहरा है. उन्होंने आधुनिक शिक्षा को भारत की प्राचीन ‘धर्म’ और ‘संस्कार’ की संस्कृति से जोड़कर सफलता का एक नया मार्ग दिखाया है.

प्रतिभा और कौशल का सार्थक इस्तेमाल

PM Modi ने सोशल मीडिया पर छात्रों के लिए न केवल अपनी शुभकामनाएं भेजीं, बल्कि एक ऐसा संस्कृत श्लोक साझा किया, जो जीवन जीने की कला सिखाता है. उन्होंने लिखा, ‘अद्भुत प्रतिभा के धनी हमारे विद्यार्थियों में अपने सपनों को सच करने की पूरी क्षमता है.

पीएम मोदी ने आगे लिखा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य भी यही है कि कैसे वे अपनी प्रतिभा और कौशल का सार्थक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके आखिर में उन्होंने एक श्लोक को भी साझा किया:

‘विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया। यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते॥’

धर्म की दृष्टि से देखें तो यह श्लोक सिर्फ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि एक सफल व्यक्तित्व की नींव है. इसका अर्थ है, विद्या (ज्ञान), वितर्क (तर्कशक्ति), विज्ञान (विवेक), स्मृति (याददाश्त), तत्परता (साहस/जोश) और क्रिया (कर्म). प्रधानमंत्री का मानना है कि जिस विद्यार्थी के पास ये छह गुण हैं, उसके लिए दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है.

धर्म और कर्म का संतुलन

इस साल की ‘परीक्षा पे चर्चा’ में पीएम मोदी ने एक बहुत ही व्यावहारिक बात कही, जो हमारे धर्मग्रंथों के ‘कर्मयोग’ से मेल खाती है. उन्होंने छात्रों से कहा, “पहले मन को जोतो, फिर मन को जोड़ो और उसके बाद पढ़ाई शुरू करो.”

धार्मिक संदर्भ में ‘मन को जोतने’ का अर्थ है आत्म-मंथन करना और अपनी शक्तियों को पहचानना. जब हम मन को एकाग्र (जोड़ना) कर लेते हैं, तो कठिन से कठिन विषय भी सरल हो जाता है. उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल ‘अंकों’ के पीछे न भागें, क्योंकि शिक्षा का असली उद्देश्य आत्म-विकास और समाज सेवा है—यही हमारा वास्तविक धर्म भी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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