पिछले कुछ सालों में बस्तर की फिजा बदली है. अब यहां की पहचान ‘बारूद’ से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, हस्तशिल्प और यहां के लोगों के चेहरे पर बढ़ते आत्मविश्वास से हो रही है. इसी बदलाव की एक शानदार झलक हाल ही में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ उत्सव में देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर के इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण की तारीफ करते हुए एक बेहद भावुक और महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है.
‘सांस्कृतिक गौरव’ से चमकता नया बस्तर
प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर पंडुम की सफलता पर खुशी जताते हुए लिखा, ‘7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर पंडुम’ का विशेष आयोजन किया गया. इस उत्सव के दौरान बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य रूप दिखा. इस प्रयास से जुड़े अपने सभी परिवारजनों को मेरी हार्दिक बधाई. ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.’
7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर पंडुम’ का विशेष आयोजन किया गया। इस उत्सव के दौरान बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य रूप दिखा। इस प्रयास से जुड़े अपने सभी परिवारजनों को मेरी हार्दिक बधाई। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और… https://t.co/dG30w413C6 pic.twitter.com/200UqiFcWi
— Narendra Modi (@narendramodi) February 10, 2026
पीएम मोदी ने आगे कहा कि पहले जब बस्तर का नाम लिया जाता था तो माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी. लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं. आज बस्तर विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जाता है. मेरी यही कामना है कि यहां का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण हो.
बदलते बस्तर की नई इबारत
प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में जिस बदलाव का जिक्र किया है, वह आज बस्तर की जमीन पर दिखने लगा है. जहां पहले गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब स्कूलों की घंटियां बज रही हैं. हाल ही में गणतंत्र दिवस पर बस्तर के 41 ऐसे गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो दशकों से माओवाद के साये में थे.
‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं. जब यहां का युवा अपनी संस्कृति पर गर्व करता है और उसे दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है, तो बंदूक की ताकत अपने आप कमजोर पड़ने लगती है. सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक माओवाद को पूरी तरह खत्म कर बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाना है.
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-भारत एक्प्रेस
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