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साइबर ठगों की अब खैर नहीं: अमित शाह ने लॉन्च किया ‘S4C’ डैशबोर्ड, CBI की नई साइबर विंग से टूटेगा अपराधियों का नेटवर्क

गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में साइबर ठगों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है. CBI की नई साइबर विंग और ‘S4C’ डैशबोर्ड के जरिए अब अपराधियों के नेटवर्क को ट्रैक करना और फंड्स को फ्रीज करना और भी आसान हो जाएगा.

Amit Shah on Cyber Crime National Conference 2026

आज के दौर में डिजिटल होना जितनी बड़ी सुविधा है, साइबर अपराध उतना ही बड़ा सिरदर्द बन चुका है. आए दिन हम सुनते हैं कि किसी का बैंक खाता खाली हो गया तो किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराया गया. इसी गंभीर खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है. दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक बेहद महत्वपूर्ण सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि भारत अब साइबर अपराधियों के लिए ‘नो-गो जोन’ बनने वाला है.

गृह मंत्री Amit Shah का संकल्प

अमित शाह ने सोशल मीडिया के जरिए देश को आश्वस्त किया कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने अपने कहा, ‘आज साइबर अपराध विश्व के लिए एक बड़ा खतरा है. हमारी सरकार इससे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.’

अमित शाह ने आगे लिखा, “आज, भारत की साइबर अपराध से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से सीबीआई द्वारा आयोजित ‘साइबर-आधारित धोखाधड़ी से निपटना और साइबर तंत्र को नष्ट करना’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करूंगा.”

CBI की नई ताकत और S4C डैशबोर्ड: क्या बदलेगा?

इस दो-दिवसीय सम्मेलन (10-11 फरवरी 2026) का सबसे बड़ा आकर्षण रहा CBI की नई साइबर अपराध शाखा (Cybercrime Branch) का उद्घाटन. अब तक सीबीआई की अलग-अलग विंग्स इस पर काम करती थीं, लेकिन अब एक समर्पित यूनिट केवल डिजिटल अपराधों की जड़ें खोदने का काम करेगी.

इसके साथ ही, गृह मंत्री ने ‘S4C’ (State Cyber Crime Coordination Centre) डैशबोर्ड भी लॉन्च किया. सरल भाषा में समझें तो यह एक ऐसा नेशनल प्लेटफॉर्म है जो पूरे देश की पुलिस और एजेंसियों को एक ही जगह पर डेटा शेयर करने की ताकत देगा.

साइबर अपराधी अक्सर दूसरों के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) का इस्तेमाल पैसे छिपाने के लिए करते हैं. अब S4C के जरिए ऐसे संदिग्ध खातों को पल भर में ट्रेस किया जा सकेगा. वहीं, फर्जी सिम और ई-सिम (eSIM) के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए टेलीकॉम विभाग के साथ मिलकर सख्त मॉनिटरिंग की जाएगी. बता दें कि अब जांच में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाएगा ताकि अपराधी के पकड़े जाने से पहले ही उसके पैटर्न को समझा जा सके.

क्यों जरूरी था यह कदम?

भारत में जिस तेजी से यूपीआई (UPI) और डिजिटल बैंकिंग बढ़ी है, उसी तेजी से ठगों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं. ‘डिजिटल अरेस्ट’, ‘इन्वेस्टमेंट स्कैम’ और ‘फिशिंग’ जैसे तरीकों से आम आदमी की मेहनत की कमाई लूटी जा रही थी. अमित शाह ने जोर देकर कहा कि साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती, इसलिए केंद्र और राज्यों की एजेंसियों को एक टीम की तरह काम करना होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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