भारत और सर्बिया के रिश्तों में इन दिनों एक नई गर्माहट देखने को मिल रही है, और इस बार चर्चा का विषय कोई पुरानी कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है. सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने हाल ही में एक शानदार लेख लिखा है, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है. इस लेख की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ तकनीक की बातें नहीं हैं, बल्कि भारत के प्रति एक गहरा सम्मान और लगाव भी झलकता है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लेख को साझा करते हुए सर्बियाई राष्ट्रपति की तारीफ की है.
PM Modi ने का रिप्लाई
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति वुसिक के लेख को सराहा और दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों पर जोर दिया.
A fine article by President Aleksandar Vučić of the Republic of Serbia, in which he talks about AI, of course, but at the same time highlights his fondness for India, India’s strides in AI and strong India-Serbia relations! @predsednikrs https://t.co/5k4yAEUMwI
— Narendra Modi (@narendramodi) February 18, 2026
पीएम मोदी ने कहा, ‘सर्बिया गणराज्य के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक का एक बेहतरीन लेख, जिसमें वे निश्चित रूप से एआई के बारे में बात करते हैं, लेकिन साथ ही भारत के प्रति अपने लगाव, एआई में भारत की प्रगति और मजबूत भारत-सर्बिया संबंधों पर भी प्रकाश डालते हैं!’
AI और भारत: दुनिया क्यों है कायल?
राष्ट्रपति वुसिक ने अपने लेख में जिस तरह से भारत की एआई प्रगति का जिक्र किया है, वह गौर करने वाली बात है. आज भारत सिर्फ सॉफ्टवेयर बनाने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि हम एआई के दौर में दुनिया को रास्ता दिखा रहे हैं. चाहे वो स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का उपयोग हो, शिक्षा में बदलाव या फिर खेती-किसानी को स्मार्ट बनाना, भारत का ‘AI for All’ का विजन दुनिया को प्रभावित कर रहा है.
वुसिक ने अपने लेख में साफ तौर पर यह स्वीकार किया है कि भारत ने जिस तेजी से तकनीक को अपनाया और उसे आम आदमी की भलाई से जोड़ा है, वह काबिले तारीफ है. सर्बिया जैसा देश आज भारत के साथ इस डिजिटल सफर में हाथ मिलाकर आगे बढ़ना चाहता है.
भारत-सर्बिया संबंधों की नई कहानी
भारत और सर्बिया का रिश्ता काफी पुराना है. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) के दौर से ही दोनों देश एक-दूसरे के करीब रहे हैं. लेकिन अब यह दोस्ती पारंपरिक व्यापार और कूटनीति से आगे निकलकर ‘हाई-टेक’ सहयोग की तरफ बढ़ रही है. राष्ट्रपति वुसिक का भारत के प्रति लगाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन उन्होंने जिस तरह से भारत की आर्थिक और तकनीकी शक्ति को सराहा है, वह दर्शाता है कि यूरोपीय देशों के लिए भारत अब कितना महत्वपूर्ण हो गया है.
सर्बिया को दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. वहां के राष्ट्रपति का भारत के पक्ष में इस तरह का लेख लिखना यह संकेत देता है कि आने वाले समय में आईटी, साइबर सुरक्षा और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


