दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) का नाम आते ही सबसे पहले जिस कॉलेज की तस्वीर जेहन में उभरती है, वह है ‘श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स’ यानी SRCC. आज इस प्रतिष्ठित संस्थान के नाम एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया. मौका था कॉलेज की स्थापना के 100 साल पूरे होने का, जिसे और भी यादगार बना दिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने. शनिवार को पीएम मोदी ने कॉलेज के शासी निकाय (Governing Body) के एक खास प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और इस ऐतिहासिक ‘सेंचुरी’ के उपलक्ष्य में एक विशेष स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamp) जारी किया.
शिक्षा की विरासत को पीएम का सलाम
ये मुलाकात महज औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें एक ऐसी संस्था के प्रति सम्मान झलका जिसने भारत की अर्थव्यवस्था और नीति-निर्माण को कई दिग्गज दिए हैं. पीएम मोदी ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए कॉलेज की तारीफों के पुल बांधे. उन्होंने कहा कि SRCC भारत के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक है और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका सराहनीय रही है.
Met a delegation consisting of the Governing Body of the Shri Ram College of Commerce, one of India’s most reputed educational institutions. This year, we are marking the centenary of this institution. A commemorative stamp was released too. My best wishes to this institution. pic.twitter.com/uxwQjW2ipz
— Narendra Modi (@narendramodi) April 25, 2026
प्रधानमंत्री ने दिल खोलकर संस्थान को शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि आने वाले 100 सालों में ये कॉलेज युवा पीढ़ी को और भी सशक्त बनाएगा.
1926 से 2026: एक सफर जो मिसाल बन गया
SRCC की कहानी साल 1926 में शुरू हुई थी. आज जब हम 2026 में खड़े हैं, तो पीछे मुड़कर देखने पर एक ऐसी गौरवशाली यात्रा नजर आती है जिसने भारत के वाणिज्य (Commerce) और अर्थशास्त्र (Economics) की दिशा तय की. दिल्ली की गलियों से शुरू हुआ ये संस्थान आज एशिया के बेहतरीन कॉलेजों में गिना जाता है.
ये कहना गलत नहीं होगा कि देश का शायद ही कोई ऐसा बड़ा उद्योग घराना या सरकारी विभाग होगा, जहां ‘SRCC’ का दबदबा न हो. नामी उद्योगपतियों से लेकर बड़े-बड़े राजनेताओं और आर्थिक सलाहकारों तक, इस कॉलेज की ‘फैक्ट्री’ से निकले टैलेंट ने दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया है.
डाक टिकट के जरिए इतिहास हुआ अमर
किसी भी संस्थान के लिए डाक टिकट जारी होना एक बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है. ये इस बात का प्रतीक है कि उस संस्थान की विरासत अब केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश की सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान का हिस्सा बन गई है. प्रतिनिधिमंडल में शामिल कॉलेज के पदाधिकारियों के लिए ये भावुक कर देने वाला पल था. प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बातचीत में कॉलेज के भविष्य के विजन और शिक्षा की नई पद्धतियों पर भी चर्चा हुई.
-भारत एक्सप्रेस
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