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पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक, बताया सम्मान और वैश्विक भाईचारे का मूल मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर दुनिया की विविध संस्कृतियों और परंपराओं के सम्मान का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान, विश्वास और सांस्कृतिक समझ से ही वैश्विक सौहार्द और सहयोग मजबूत होता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी संस्कृत सुभाषित शेयर किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इस पोस्ट के जरिए वैश्विक समाज को आपसी समझ और भाईचारे का एक बड़ा संदेश दिया है. पीएम मोदी ने लिखा कि दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान करने से लोगों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग की भावना बहुत तेजी से बढ़ती है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हम एक-दूसरे की संस्कृति को आदर देते हैं, तो इससे समाज में आपसी समझ गहरी होती है और भाईचारा और ज्यादा मजबूत होता है. पीएम मोदी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक समन्वय की बात की जा रही है.

पीएम मोदी ने शेयर किया श्लोक(PM Modi Sanskrit Shlok)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस संस्कृत श्लोक को दुनिया के सामने साझा किया है, वह मनुष्य के विवेक और व्यवहार को दर्शाता है. पीएम मोदी द्वारा पोस्ट किया गया श्लोक है-“देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः. स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥”

इस गूढ़ श्लोक का हिंदी में बेहद सरल और गहरा अर्थ है कि जो व्यक्ति दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों, अलग-अलग परंपराओं और सामाजिक नियमों को गहराई से समझने की कोशिश करता है, उसके भीतर उचित और अनुचित का सही विवेक विकसित हो जाता है.

संस्कृत सुभाषित में छिपा है वैश्विक सम्मान पाने का रहस्य

इस श्लोक के अगले भाग में प्रधानमंत्री ने समाज में सम्मान पाने का असली सूत्र बताया है. श्लोक के अनुसार, विभिन्न परंपराओं का आदर करने वाला ऐसा ज्ञानवान और संवेदनशील व्यक्ति दुनिया के जिस भी कोने में जाता है, वहां के लोग उसे सिर-आंखों पर बिठाते हैं और वह हर जगह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करता है. इतना ही नहीं, ऐसा व्यक्ति श्रेष्ठजनों और बुद्धिजीवियों के बीच भी हमेशा अपना एक गहरा और सकारात्मक प्रभाव स्थापित करने में पूरी तरह सफल रहता है.

सौहार्द के लिए पहले भी दिया महा-मंत्र

दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी पिछले कुछ दिनों से लगातार सोशल मीडिया पर इन ऐतिहासिक सुभाषितों के जरिए देश और दुनिया को बड़े संदेश दे रहे हैं. इससे पहले बीते 26 जून को भी प्रधानमंत्री ने ‘सङ्गच्छध्वं संवदध्वं’ वाला प्रसिद्ध श्लोक साझा किया था, जिसका अर्थ था कि हम सब साथ मिलकर चलें, एक सुर में बोलें और हमारे मन व विचार एक हों. जिस प्रकार प्राचीनकाल में देवता एकमत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते थे, ठीक उसी तरह हमें भी हमेशा एकता और सौहार्द के साथ कार्य करना चाहिए.

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लोकतंत्र के महत्व पर साझा किए विचार

वहीं, पिछले दिनों ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर भी पीएम मोदी ने आपातकाल के काले दौर को याद करते हुए स्वतंत्रता के महत्व पर एक खास श्लोक साझा किया था. उस सुभाषित का अर्थ था कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य को असली सुख, सर्वोच्च उपलब्धि, मानसिक शांति और परम पद की प्राप्ति होती है. पीएम मोदी के ये लगातार आ रहे पोस्ट सोशल मीडिया पर इस वक्त भारी ट्रेंड में हैं और लोग इसे भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान से जोड़कर देख रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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