प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (1 जून) को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर एक बेहद प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक शेयर किया है. ये श्लोक एक आदर्श शिक्षक की भूमिका और हमारी सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा की अहमियत को बहुत ही खूबसूरत अंदाज में बयां करता है. पीएम मोदी की इस पोस्ट के साथ एक छोटा सा वीडियो भी है, जिसमें गुरु-शिष्य की तस्वीरें, हिंदी व्याख्या और अंग्रेजी अनुवाद शामिल हैं, ताकि आम लोग इसे आसानी से समझ सकें.
संयुक्त क्रिया एक शब्द के अर्थ का स्थानांतरण
पीएम मोदी ने अपने पोस्य में लिखा, ‘संयुक्त क्रिया एक शब्द के अर्थ का स्थानांतरण है, जिसमें एक विशिष्ट गुण होता है, और इसे उसी से संबंधित दूसरे शब्द पर लागू किया जाता है.’
पीएम मोदी ने आगे लिखा कि जो इन दोनों गुणों से युक्त है, उसे शिक्षकों के कर्तव्य में दृढ़ता से शामिल किया जाना चाहिए.’ इसके साथ ही उन्होंने श्लोक साझा किया.
श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता।
यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव।। pic.twitter.com/xKT12kwrRt
— Narendra Modi (@narendramodi) June 1, 2026
श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता ।
यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव ।।
क्या है श्लोक का अर्थ?
इसका सीधा और सरल मतलब यह है कि वही इंसान गुरुओं या शिक्षकों में सर्वोच्च स्थान पाने का असली हकदार है, जिसके पास दो खास खूबियां हों.पहली— वह खुद अपने ज्ञान या काम में पूरी तरह निपुण हो. दूसरी, उसके पास अपने उस ज्ञान को दूसरों तक, यानी अपने शिष्यों तक उतने ही प्रभावी और आसान ढंग से पहुंचाने की कला हो.
सही गाइड करने वाला असली गुरु
शिक्षा जगत के दिग्गजों का मानना है कि पीएम मोदी का ये संदेश आज की डिजिटल पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट के दौर में बेहद जरूरी है. एक अच्छा टीचर सिर्फ वही नहीं है जिसके पास ज्ञान का भंडार हो, बल्कि असली गुरु वह है जो एक सही गाइड बनकर छात्र का मार्गदर्शन करे.
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-भारत एक्सप्रेस
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