आज पूरा देश उस काले दिन को याद कर रहा है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा और दशा हमेशा के लिए बदल दी थी. 13 अप्रैल 1919- अमृतसर का वह जलियांवाला बाग, जहाँ जनरल डायर की क्रूरता ने निहत्थे मासूमों के खून से होली खेली थी. आज इस नरसंहार की 107वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन महान बलिदानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. पीएम ने जोर देकर कहा कि उन शहीदों का अदम्य साहस आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है.
शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए लिखा, “आज के दिन हम जलियांवाला बाग के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.”
On this day, we pay our heartfelt homage to the brave martyrs of Jallianwala Bagh. Their sacrifice stands as a powerful reminder of the indomitable spirit of our people. The courage and determination they displayed continue to inspire generations to uphold the values of liberty,…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 13, 2026
पीएम मोदी ने आगे कहा कि उनका बलिदान हमारे जनमानस के अदम्य साहस का सशक्त प्रमाण है. उनके द्वारा प्रदर्शित साहस और दृढ़ संकल्प आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों को कायम रखने के लिए प्रेरित करता रहेगा.
इतिहास का जख्म
ये दिन हमें इतिहास के उस दौर में ले जाता है जब रॉलेट एक्ट के विरोध में बैसाखी के दिन लोग शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे. बिना किसी चेतावनी के गोलियां बरसाई गईं और वो बाग देखते ही देखते लाशों के ढेर में तब्दील हो गया.
ये एक दुखद याद नहीं, बल्कि वो मोड़ था जहाँ से ब्रिटिश हुकूमत के अंत की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी. इसी नरसंहार ने भगत सिंह जैसे मासूम बच्चे के मन में इंकलाब की मशाल जलाई और ऊधम सिंह जैसे योद्धा को जन्म दिया.
विकसित भारत का संकल्प
‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के बाद अब देश जब ‘विकसित भारत 2047’ की ओर बढ़ रहा है, तो ऐसे शहीदों का स्मरण हमें हमारे मूल कर्तव्यों की याद दिलाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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