Prashant Kishor Banikpur Win: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज कर ली है. यह वही सीट है जो पिछले तीन दशकों से बीजेपी के कब्जे में रही थी. नितिन नवीन और उनके पिता लगातार यहां से जीतते रहे लेकिन इस बार तस्वीर बदल गई.
बीजेपी की उम्मीदें टूटीं
नितिन नवीन को हाल ही में बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और वह राज्यसभा भी पहुंच गए. माना जा रहा था कि उनकी विरासत वाली सीट पर बीजेपी आसानी से जीत जाएगी. नतीजे ने सबको चौंका दिया. प्रशांत किशोर ने यहां बड़ी जीत हासिल की और बीजेपी को उसके गढ़ में ही मात दी.
कमजोर उम्मीदवार बना वजह
नितिन नवीन के दिल्ली शिफ्ट होने के बाद बीजेपी ने बांकीपुर से नीरज सिन्हा को उतारा. वह मंडल स्तर के कार्यकर्ता रहे हैं और उनका कोई बड़ा चुनावी अनुभव नहीं था. प्रचार और रणनीति में भी वह प्रशांत किशोर के सामने कमजोर साबित हुए.
पीके का पॉजिटिव कैंपेन
प्रशांत किशोर ने पूरे चुनाव में सकारात्मक प्रचार किया. उन्होंने अपने एजेंडे पर बात की, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाया. खास बात यह रही कि उन्होंने बीजेपी पर सीधे हमले नहीं किए और नितिन नवीन पर निजी टिप्पणी से भी बचते रहे. यही उनकी रणनीति का बड़ा प्लस पॉइंट रहा.
दोतरफा मुकाबला
इस चुनाव में मुकाबला पूरी तरह दोतरफा रहा. आरजेडी उम्मीदवार रेखा कुमारी को मुश्किल से दस हजार वोट मिले. ऐसे में बड़ा वोट सीधे प्रशांत किशोर की तरफ गया. ब्राह्मण समुदाय से आने वाले पीके को बीजेपी के वोटरों का भी समर्थन मिला.
नहीं चला जंगलराज का कार्ड
बीजेपी अक्सर आरजेडी के जंगलराज का डर दिखाकर वोट जुटाती रही है लेकिन पीके के नाम पर यह कार्ड काम नहीं आया. उनकी साफ छवि और सकारात्मक प्रचार ने बीजेपी के वोटरों को भी आकर्षित किया.
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बड़ा राजनीतिक संदेश
बांकीपुर उपचुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट की जीत नहीं है. यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका है और प्रशांत किशोर के राजनीतिक करियर के लिए मील का पत्थर है. इस जीत ने साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में अब नए समीकरण बन रहे हैं और बदलाव की हवा तेज हो चुकी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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