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राहुल गांधी को सजा सुनाने वाले जज के प्रमोशन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, 67 और जजों की पदोन्नति भी रुकी

शीर्ष अदालत का आदेश वरिष्ठ सिविल जज कैडर के अधिकारियों रविकुमार महेता और सचिन प्रतापराय मेहता की याचिका पर आया, जिसमें जिला न्यायाधीशों के उच्च कैडर में 68 न्यायिक अधिकारियों के चयन को चुनौती दी गई थी.

Rahul Gandhi

राहुल गांधी (दाएं)

सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दोषी करार देने वाले जज हरीश हसमुखभाई वर्मा समेत गुजरात के 68 निचले न्यायिक अधिकारियों का प्रमोशन रोक दिया है. जस्टिस एम.आर. शाह और सी.टी. रविकुमार ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा जारी की गई सूची और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जिला न्यायाधीशों को पदोन्नति देने का आदेश अवैध और इस अदालत के फैसले के विपरीत है.

पीठ ने पदोन्नति पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश पारित किया और कहा कि इस मामले की सुनवाई एक उपयुक्त पीठ द्वारा की जानी चाहिए क्योंकि न्यायमूर्ति शाह 15 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति ने 2011 में संशोधित गुजरात राज्य न्यायिक सेवा नियम 2005 का उल्लंघन किया. नियमों के अनुसार, योग्यता-सह-वरिष्ठता के सिद्धांत और उपयुक्तता परीक्षण पास करने के बाद ही पदोन्नति की जानी चाहिए. पीठ ने पदोन्नति सूची के कार्यान्वयन पर रोक लगाते हुए संबंधित जजों को उनके मूल पदों पर भेज दिया, जिन पर वे अपनी पदोन्नति से पहले काम कर रहे थे. शीर्ष अदालत का आदेश वरिष्ठ सिविल जज कैडर के अधिकारियों रविकुमार महेता और सचिन प्रतापराय मेहता की याचिका पर आया, जिसमें जिला न्यायाधीशों के उच्च कैडर में 68 न्यायिक अधिकारियों के चयन को चुनौती दी गई थी.

शीर्ष अदालत ने 28 अप्रैल के अपने आदेश में कहा था कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तथ्य के बावजूद कि प्रतिवादी, विशेष रूप से राज्य सरकार, वर्तमान कार्यवाही से अवगत थी और ..इसके बावजूद राज्य सरकार ने वर्तमान कार्यवाही में इस अदालत द्वारा जारी नोटिस की प्राप्ति के बाद 18 अप्रैल 2023 को पदोन्नति आदेश जारी किया है.

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खंडपीठ ने कहा, हम उस जल्दबाजी और हड़बड़ी की सराहना नहीं करते हैं जिसमें राज्य ने 18 अप्रैल 2023 को पदोन्नति आदेश को मंजूरी दी और पारित किया. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि चयन वर्ष 2022 का था और इसलिए पदोन्नति आदेश पारित करने में कोई असाधारण जल्दबाजी नहीं थी और वह भी तब जब यह मामला अदालत में था. सूरत के सीजेएम वर्मा वर्तमान में गुजरात सरकार के कानूनी विभाग में अवर सचिव और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण में सहायक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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