Rahul Gandhi vs Ravi Shankar Prasad: लोकसभा में इन दिनों लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था के ‘कैप्टन’ यानी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर ऐतिहासिक बहस चल रही है. बुधवार को चर्चा के दौरान सदन में उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. राहुल ने कहा कि देश की आवाज को सदन में दबाया जा रहा है और प्रधानमंत्री ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (समझौतावादी) हैं. इस टिप्पणी ने सत्ता पक्ष को आगबबूला कर दिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया.
विपक्ष की आवाज का गला घोंटा जा रहा- Rahul Gandhi
चर्चा में हिस्सा लेते हुए राहुल गांधी ने सीधे तौर पर स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह सदन देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन जब भी विपक्ष का नेता बोलने के लिए खड़ा होता है, उसे रोक दिया जाता है. मुझे बार-बार रूल बुक दिखाई जाती है. राहुल ने आगे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड हैं और सदन को पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित किया जा रहा है.
रविशंकर प्रसाद का पलटवार
राहुल गांधी के ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ शब्द का इस्तेमाल करते ही भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने सदन में चिल्लाकर विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि नेवर…नेवर! पीएम मोदी का भारत कभी कॉम्प्रोमाइज्ड नहीं होगा. राहुल गांधी को संसदीय मर्यादा की बेसिक समझ भी नहीं है. प्रसाद ने राहुल के पुराने व्यवहार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “विपक्ष के नेता कभी सदन में आंख मारते हैं, तो कभी पीएम के गले पड़ते हैं, यह कौन सा व्यवहार है?
अविश्वास प्रस्ताव पर सियासी घमासान
विपक्ष का आरोप है कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को 20 से अधिक बार बोलने से रोका गया. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं. वहीं, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब सदन चलता है, तो राहुल गांधी विदेश चले जाते हैं और फिर कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया.
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रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये लोग सदन को ‘अराजकता’ में बदलना चाहते हैं. उन्होंने सेना और शहादत पर सबूत मांगने के पुराने मुद्दों को भी उछाला और कहा कि स्पीकर ने कई बार सदन में कागज फेंके जाने और अपमान के बावजूद मुस्कुराकर धैर्य दिखाया है.
संसद में तैयार हो रही है सियासी पिच
संसद में चल रही यह बहस केवल एक पद (स्पीकर) तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आगामी चुनावी राजनीति की पिच तैयार कर रही है. राहुल गांधी जहाँ खुद को देश की दबी हुई आवाज के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं भाजपा उन्हें एक ‘अपरिपक्व’ नेता साबित करने में जुटी है. गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन के बाद इस चर्चा का रुख और भी कड़ा होने की उम्मीद है. फिलहाल, सदन की गरिमा और अविश्वास प्रस्ताव के बीच लोकतंत्र का यह टकराव सुर्खियों में बना हुआ है.
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