Ashok Gehlot controversy: राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर सुर्खियों में है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच खींचतान गुरुवार को खुले मंच पर दिखी. मामला तब गरमा गया जब आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय अपनी टोली के साथ गहलोत के आवास पहुंचे और वहां गहलोत को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया. इसी दौरान कार्यकर्ताओं ने गहलोत को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए, जिससे माहौल गर्म हो गया.
मालवीय की वापसी और नया सियासी समीकरण
मालवीय, जो पिछले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में चले गए थे. हाल ही में अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए. गुरुवार को वे भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के करीब 300 नेताओं और कार्यकर्ताओं को कांग्रेस में शामिल कराने जयपुर पहुंचे. उन्होंने सीधे पीसीसी जाने के बजाय गहलोत के घर का रुख किया. ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे मालवीय ने गहलोत को पगड़ी पहनाई और समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की.
डोटासरा की नाराजगी
गहलोत के समर्थन में लगे नारों ने डोटासरा को खफा कर दिया. उन्होंने बिना नाम लिए गहलोत पर तंज कसते हुए इसे व्यक्तिगत ब्रांडिंग बताया और कहा कि पार्टी मंच पर ऐसे नारे घातक साबित हो सकते हैं. डोटासरा ने मालवीय को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें पहले सोचना चाहिए था कि किस जगह जाना उचित होता.
पीसीसी दफ्तर में टकराव
बाद में जब मालवीय अपनी टोली के साथ कांग्रेस कार्यालय पहुंचे तो डोटासरा ने उनसे काफी देर तक मुलाकात नहीं की. मंच पर आने के बाद उन्होंने मालवीय से माइक छीनकर साफ कहा कि यहां किसी के व्यक्तिगत नारे नहीं लगाए जाएंगे. यह पार्टी का मंच है और यहां संगठन की बात होगी, किसी व्यक्ति की नहीं.
चुनावी आरोप
डोटासरा ने मालवीय पर तंज कसते हुए बड़ा आरोप भी जड़ दिया. उन्होंने कहा कि अगर 2024 लोकसभा चुनाव में मालवीय की मदद उन्होंने की होती तो आज उनके समर्थन में भी नारे लगते. इस बयान को गहलोत पर परोक्ष आरोप माना गया कि उन्होंने चुनाव के दौरान मालवीय को सहयोग दिया था.
बांसवाड़ा-डूंगरपुर सीट का संदर्भ
2024 के लोकसभा चुनाव में मालवीय बीजेपी से बांसवाड़ा सीट पर उतरे थे जबकि कांग्रेस ने भारत आदिवासी पार्टी को समर्थन दिया था. बीएपी उम्मीदवार राजकुमार रौत ने जीत दर्ज की और मालवीय हार गए. इस पृष्ठभूमि में डोटासरा का बयान गहलोत पर सीधा निशाना माना जा रहा है.
गुटबाजी का असर
गहलोत और डोटासरा के बीच यह टकराव कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को और जटिल बना रहा है. मालवीय की वापसी और उनके साथ आए कार्यकर्ताओं की नारेबाजी ने पार्टी में शक्ति संतुलन की नई बहस छेड़ दी है. अब देखना होगा कि कांग्रेस इस गुटबाजी को कैसे संभालती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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