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बच्चों की सुरक्षा या पारदर्शिता पर ताला? राजस्थान सरकार के नए स्कूल आदेश से विवाद

Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग पर नई व्यवस्था लागू की है.

Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं. अब कोई भी व्यक्ति बिना प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकेगा.

आदेश में क्या कहा गया?

16 अगस्त को माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी आदेश में साफ किया गया कि स्कूल परिसर में बाहरी व्यक्ति तभी प्रवेश कर पाएगा जब उसे प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख से पूर्व अनुमति मिली हो. केवल सरकारी ड्यूटी पर आए अधिकृत अधिकारी इस नियम से बाहर रखे गए हैं. हर आगंतुक को विजिटर रजिस्टर में नाम दर्ज करना होगा और वह अकेले कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास या खेल मैदान में नहीं जा सकेगा.

फोटो और वीडियो पर रोक

इस आदेश का सबसे अहम हिस्सा कैमरे और रिकॉर्डिंग से जुड़ा है. अब विद्यार्थियों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति जरूरी होगी. बच्चों की तस्वीरें या निजी जानकारी का ऐसा इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा जिससे उनकी सुरक्षा प्रभावित हो.

नियम तोड़ने पर कार्रवाई

अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल में घुसता है, बाहर जाने से इनकार करता है या अनधिकृत फोटो-वीडियो बनाता है तो प्रधानाचार्य को पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचना देनी होगी. आदेश में कहा गया है कि परिस्थितियों के अनुसार BNS, POCSO Act, किशोर न्याय अधिनियम और IT Act जैसे कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. यानी केवल फोटो खींचने पर अपने आप केस दर्ज नहीं होगा बल्कि हालात के अनुसार कदम उठाए जाएंगे.

सरकार का तर्क

शिक्षा विभाग ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और निजता सर्वोपरि है. संविधान के अनुच्छेद 21, सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले और NCPCR की स्कूल सुरक्षा नीति का हवाला देते हुए विभाग ने बताया कि स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित और बाल-अनुकूल वातावरण बनाना होगा. आदेश में ‘In Loco Parentis’ यानी अभिभावक जैसी जिम्मेदारी निभाने का सिद्धांत भी शामिल किया गया है.

क्यों उठा विवाद?

जैसे ही आदेश सामने आया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया. विपक्ष का आरोप है कि सरकार बच्चों की सुरक्षा के नाम पर स्कूलों की पारदर्शिता कम कर रही है. कांग्रेस ने भी सवाल उठाए कि क्या यह कदम स्कूलों की जमीनी हकीकत को छिपाने के लिए ह?

मंत्री ने क्या कहा?

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि मीडिया पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. आदेश को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों की निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अनुमति की व्यवस्था की गई है. अभिभावक या शिक्षक की सहमति लेकर विद्यार्थियों से बातचीत की जा सकती है.

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मुद्दा सिर्फ कैमरे का नहीं है असली सवाल बच्चों की निजता बनाम सरकारी स्कूलों की पारदर्शिता का है. अब देखना होगा कि यह नई व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करती है या फिर स्कूलों की असल तस्वीर तक पहुंचना और मुश्किल बना देती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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