Kota Hospital Case: कोटा के सरकारी अस्पताल में चंद रुपयों के कमीशन के चक्कर में गर्भवती महिलाओं की जिंदगी दांव पर लगा दी गई. यहां डिलीवरी के बाद माताओं को दी जाने वाली जीवनरक्षक दवा ही नकली और जानलेवा निकली. इस खूनी लापरवाही ने अस्पताल प्रशासन और भ्रष्ट सिस्टम के चेहरे को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है.
राजस्थान के कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Kota New Medical College Hospital) में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला खौफनाक मामला सामने आया है. यहां डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग रोकने के लिए प्रसूताओं को दिए गए ‘ऑक्सीटोसिन’ (Oxytocin) इंजेक्शन नकली निकले, जिसके कारण 5 माताओं की मौत हो गई और 12 महिलाएं किडनी फेलियर (kidney failure) व गंभीर इंफेक्शन से जूझ रही हैं.
ड्रग कंट्रोल विभाग की लैब रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर की ‘जैक्सन लैबोरेट्रीज’ (Jackson Laboratories) के इस इंजेक्शन में मुख्य सॉल्ट गायब था और उसकी जगह सिर्फ पानी भरा हुआ था.
अन्य दवाइयां और उपकरण भी जांच में फेल
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत सप्लाई की गईं करीब 11 से 24 अन्य दवाइयां और उपकरण भी जांच में फेल पाए गए हैं. चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि अस्पताल प्रशासन ने बिना किसी उच्च स्तरीय अनुमति के, लोकल स्तर पर एक बाहरी कंपनी से चुपके से करीब 4,000 संदिग्ध इंजेक्शन खरीदे और इन्हें 11,500 से अधिक गर्भवती महिलाओं को लगा दिया गया.
लापरवाही छुपाने के लिए डॉक्टरों को किया सस्पेंड
बता दें कि शुरुआत में प्रशासन ने अपनी लापरवाही छुपाने के लिए डॉक्टरों को सस्पेंड कर बलि का बकरा बनाया था. लेकिन अब लैब रिपोर्ट (medical update) ने साफ कर दिया है कि असली गुनाहगार चंद रुपयों के कमीशन के लिए नकली दवाओं की सप्लाई करने वाली भ्रष्ट चेन और जिम्मेदार अधिकारी हैं (hospital investigation).
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-भारत एक्सप्रेस
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