रिपोर्ट: कजोड़ गुर्जर, टोंक
राजस्थान के टोंक जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहाँ के दूनी थाना पुलिस पर एक युवक को कस्टडी में लेकर बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है. कथित पुलिसिया जुल्म के शिकार हुए भागचंद रैगर के बेबस परिजन बुधवार को न्याय की गुहार लगाने कलेक्ट्रेट पहुंच गए. हाथों में तख्तियां लिए पीड़ित परिवार ने कलेक्ट्रेट पर जमकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के सामने दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने, 20 लाख रुपये का मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी.
क्या था कसूर?
दिल दहला देने वाली यह वारदात 14 जून की बताई जा रही है. पीड़ित के पिता प्रहलाद रैगर का आरोप है कि उनका बेटा भागचंद रास्ते में दो पक्षों के बीच हो रहे किसी झगड़े को सिर्फ देख रहा था. तभी मौके पर पहुंची दूनी थाना पुलिस उसे पूछताछ के बहाने उठाकर थाने ले आई. पिता का आरोप है कि थाने में तैनात कुछ पुलिसकर्मी उस वक्त शराब के नशे में धुत थे और उन्होंने रात भर भागचंद को पट्टों और लाठियों से बेतहाशा पीटा.
पुलिस की यह पिटाई इतनी खौफनाक थी कि भागचंद की पसलियां और रीढ़ की हड्डी तक टूट गई. जब उसकी हालत बिल्कुल नाजुक हो गई, तो उसे आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह इस वक्त जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है. इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके के लोगों में भारी गुस्सा है.
थानाधिकारी को सिर्फ ‘एपीओ’ करने पर भड़के परिजन
मामला बढ़ता देख टोंक पुलिस अधीक्षक (SP) ने तुरंत एक्शन लेते हुए दूनी थानाधिकारी को एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर लाइन हाजिर तो कर दिया है, लेकिन पीड़ित परिवार इस कार्रवाई से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है. परिजनों का कहना है कि एपीओ करना कोई बड़ी सजा नहीं है. यह तो सिर्फ मामले को शांत करने की कोशिश है. परिवार की मांग है कि जिन पुलिसवालों ने भागचंद की यह हालत की है, उन्हें तुरंत नौकरी से सस्पेंड किया जाए और उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए. फिलहाल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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