Rajmata Vijayaraje Scindia Jayanti: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन अर्पित किया. शाह ने कहा कि राजमाता ने राजसी वैभव का त्याग कर जनसेवा का मार्ग अपनाया और आजीवन राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत बनाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. आपातकाल के दौरान उन्होंने महीनों की जेल यातनाएं सहीं, लेकिन सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया.
राजसी वैभव छोड़ जनसेवा का रास्ता चुना
शाह ने अपने संदेश में राजमाता के जीवन के उस पहलू को रेखांकित किया जिसमें उन्होंने शाही सुख-सुविधाओं को छोड़कर आम लोगों की सेवा का रास्ता चुना. ग्वालियर के शाही परिवार से जुड़ी होने के बावजूद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत करने के लिए निरंतर काम किया. उनके इस निर्णय को शाह ने त्याग और समर्पण का प्रतीक बताया.
आपातकाल के खिलाफ संघर्ष और अडिग सिद्धांत
राजमाता विजयाराजे सिंधिया आपातकाल (1975-77) के दौरान विपक्षी आवाजों में शामिल रहीं. इस दौरान उन्हें जेल में बंद रखा गया और कई महीनों तक यातनाएं झेलनी पड़ीं. अमित शाह ने कहा कि इतनी कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से तनिक भी समझौता नहीं किया. यह उनका अटूट संकल्प था जो आज भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए मिसाल है.
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कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
शाह ने स्पष्ट किया कि राजमाता का जीवन हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. उन्होंने राष्ट्रवाद, सेवा और सिद्धांतनिष्ठा की मिसाल कायम की. जयंती के अवसर पर उनके योगदान को याद करते हुए शाह ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व देश की राजनीति को दिशा देते हैं. उनके आदर्श आज भी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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