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‘दोषियों को दो सख्त सजा..!’ चंपत राय और नृपेन्द्र मिश्रा से हुई थी बातचीत, राम मंदिर मामले पर क्या बोले स्वामी कैलाशानंद गिरी?

महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने दावा किया कि राम मंदिर विवाद के बाद उनकी चंपत राय और नृपेन्द्र मिश्रा से फोन पर बातचीत हुई थी. उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और प्रबंधन को लेकर खड़े हुए विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. इस बीच, निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरीजी महाराज ने एक डिजिटल पॉडकास्ट में  मामले को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है. बता दें स्वामी कैलाशानंद गिरी ने दावा किया है कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच उनकी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा और ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय से लंबी फोन पर बातचीत हुई थी.

इस दौरान उन्होंने नृपेन्द्र मिश्रा को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इतने पवित्र कार्य में कोई लापरवाही या कमी पाई जाती है, तो इसके सीधे जिम्मेदार जिम्मेदारी संभाल रहे आला अधिकारी ही होंगे और मामले के जो भी दोषी हों उन्हे भी जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए.

चंपत राय से हुई थी 50 मिनट बात

पॉडकास्ट के दौरान स्वामी कैलाशानंद गिरीजी महाराज ने अंदरखाने की बातचीत का पर्दाफाश करते हुए बताया कि घटना के बाद उनकी राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य लोगों से सीधी बातचीत हुई थी. उन्होंने बताया कि एक दिन चंमत राय जी से मेरी 50 मिनट तक फोन पर लंबी बात हुई.

उसके ठीक अगले दिन राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा का कॉल आया, जिसे मेरे मीडिया प्रभारी शांतनु ने कनेक्ट कराया था. संतों के इस तरह खुलकर सामने आने से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

स्वामी कैलाशानंद गिरी का 2 टूक जवाब

स्वामी कैलाशानंद गिरी ने बताया कि उन्होंने बातचीत के दौरान राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा को बेहद दो टूक शब्दों में अपनी राय रखी. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कॉल पर कहा कि ”आप देश के प्रधानमंत्री के चुनिंदा नवरत्नों में से एक हैं. आपकी सीधी देखरेख और निर्देशन में यदि राम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन या व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई कोताही या कमी आई है, तो इसके सीधे उत्तरदायी आप खुद हैं.”

इसके अलावा संत ने मांग की कि इस मामले की तह तक जाकर स्थिति को तुरंत सुधारा जाए और जो भी दोषी हो, उसे बख्शा न जाए.

विवाद पर संत समाज की नाराजगी

भले ही मंदिर ट्रस्ट के भीतर फेरबदल और जांच का दौर चल रहा हो, लेकिन देश के बड़े संतों का इस तरह खुलकर मैदान में उतरना यह साफ करता है कि मामला सिर्फ प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं है. करोड़ों राम भक्तों की आस्था के केंद्र अयोध्या में इस तरह के विवाद सामने आने के बाद से संत समाज में भी भारी बेचैनी और रोष है.

संतों का साफ कहना है कि रामलला के दरबार में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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