रांची। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM), झारखंड प्रदेश द्वारा रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को प्रेस क्लब, रांची में एकदिवसीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “शिक्षा, सामाजिक समरसता और विकसित भारत” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे हुआ और दोपहर 1 बजे तक चला। तय समय के अनुसार मंच के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में प्रेस क्लब पहुंचे।
मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय संयोजक सह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शाहिद अख़्तर उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने मंच के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि कार्यक्रम का विषय ही बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हासिल करने से ही सामाजिक समरसता स्थापित होगी। मंच अपने स्थापना काल से ही इस बात के लिए प्रयासरत है कि मुस्लिम समाज शिक्षित हो। इसके लिए मंच ने राष्ट्रीय स्तर पर मुहिम चलाई हुई है।
शिक्षा और चरित्र निर्माण पर ज़ोर
प्रो. अख़्तर ने कहा कि यदि हम शिक्षा की बात करें तो हमारे लिए भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम बेहतरीन मिसाल हैं, जिन्होंने शिक्षा हासिल करके न केवल समाज का कल्याण किया बल्कि देश का नाम भी पूरी दुनिया में रौशन किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में आए सभी युवाओं की ज़िम्मेदारी है कि अपनी शिक्षा के साथ-साथ अपने समाज को भी शिक्षित करने की ज़िम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि हमारे लिए ज़रूरी है कि शिक्षा को प्राप्त करके चरित्र निर्माण का कार्य करें और इसके माध्यम से देश की सेवा करें।
सामाजिक समरसता और संवाद का महत्व
प्रो. अख़्तर ने कहा कि यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता का भी है। इसलिए पहले हमें यह समझना होगा कि हम भारत जैसे महान देश के निवासी हैं और हमारे देश के बारे में विविधता में एकता की बात मशहूर है। सदियों से इस देश में विभिन्न धर्म, जाति और संप्रदाय के लोग निवास करते आ रहे हैं। देश के सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के मध्य समरसता रहे, इसी के लिए मंच निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जहां विवाद है, उसका समाधान संवाद के द्वारा होना चाहिए। संवाद करने से कटुता कम होगी और सामाजिक समरसता क़ायम होगी।
दहशत मुक्त और दंगा मुक्त भारत का संकल्प
प्रो. अख़्तर ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां सबको उन्नति का समान अवसर प्राप्त है, कोई किसी को रोकता नहीं है। इसलिए अपने आपको इस क़ाबिल बनाना चाहिए कि हम भी उन्नति करें और अपना योगदान देश के विकास में दें। उन्होंने कहा कि यदि नफ़रत और कटुता समाज में रहेगी तो व्यक्ति निर्माण से लेकर देश निर्माण तक बाधा उत्पन्न होगी। इसलिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने यह मुहिम चलाई है कि भारत को दहशत मुक्त और दंगा मुक्त बनाना है। इसके लिए भारत के सभी वर्गों के बीच समरसता क़ायम करनी है, जो देश के विकास का सूचक है।
संघ से संवाद और भारतीय संस्कृति
उन्होंने कहा कि मंच यह भी प्रयास करता है कि भारत का मुस्लिम समाज संघ से भी संवाद करे। दूर के क़रीब आने से शंका दूर होती है। इसके लिए मंच ने देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि संघ के सर संघचालक ने भारत और विदेश में भी यह बात प्रमुखता से कही कि जो हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम न रहे, वह हिंदू नहीं है। भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की है। भारत के लिए सभी अपने हैं और भारत विश्व कल्याण की संस्कृति वाला देश है।
प्रो. अख़तर ने कहा कि भारतीय होने के नाते हमें भारत की संस्कृति को भी समझना होगा। हम विश्व में कहीं भी जाएं, हमारी पहचान भारतीय है। इसी पहचान के साथ और भारत की संस्कृति के साथ हमें अपने देश में भी रहना है और सामाजिक समरसता को स्थापित करना है। यही मंच का उद्देश्य है और इसी के लिए हम आग्रह करते हैं कि मंच के साथ जुड़कर काम किया जाए।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा वर्ग मौजूद था। कार्यक्रम का संचालन प्रो. नाज़िश हसन ने किया और धन्यवाद प्रस्ताव प्रो. अशफ़ाक़ ने दिया। मंच के कार्यक्रम में हाजी एजाज़ (प्रदेश संयोजक), तनवीर अब्बास, प्रो. अशफ़ाक़, प्रो. नाज़िश हसन, नौशाद आलम, बीजेपी से जॉनी वाकर ख़ान, योग टीचर राफ़िया नाज़, डॉ. रणधीर वर्मा, डॉ. अमित चतुर्वेदी, अरशद अख़तर, इम्मामुल हसन, ज़ीशान, डॉ. शाहनवाज़ अख़्तर तथा बड़ी संख्या में मंच के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
— भारत एक्सप्रेस
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