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रेड कॉरिडोर से रेल कॉरिडोर तक, कैसे मोदी सरकार बदल रही कॉरिडोर के मायने

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में 7 उच्च-गति रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है. जिसमें से मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं. ये कॉरिडोर देश के प्रमुख शहरों के बीच तेज और बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेंगे.

Budget 2026

Budget 2026: साल 2019 में देश में दूसरी बार पीएम मोदी के देश की बागडोर संभालने के बाद अमित शाह ने गृह मंत्रालय की कमान संभाली. गृह मंत्री बनते ही उन्होंने ऐलान किया कि 31 मार्च 2026 तक देश से रेड कॉरिडोर यानी नक्सलियों की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे. पिछले 2 सालों में कई बड़े नक्सलियों का खात्मा कर उनकी कमर तोड़ी जा चुकी है. अब साल 2026 का यह बजट इस रेड कॉरिडोर के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा.

लगातार 9वीं बार बजट पेश कर इतिहास रचने वाली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में 7 उच्च-गति रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है. जिसमें से मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं. ये कॉरिडोर देश के प्रमुख शहरों के बीच तेज और बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेंगे. इससे ना सिर्फ दो प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय कम हो जाएगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

मुंबई-पुणे रेल कॉरिडोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकास संयोजक के रूप में मुंबई से पुणे के बीच उच्च-गति रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है. महाराष्ट्र के दो सबसे बड़े और औद्योगिक शहरों के बीच रेल कॉरिडोर बनने से इनके बीच ना सिर्फ दूरी घटेगी, बल्कि दोनों शहरों के बीच व्यापार की गति को भी बढ़ावा मिलेगा. वहीं कॉरिडोर बनने से इन शहरों के विकास को भी गति मिलेगी.

पुणे-हैदराबाद

महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्य के बीच यह कॉरिडोर एक पुल का काम करेगा. इससे ना सिर्फ इंटर स्टेट कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों राज्यों के बीच उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. पुणे को महाराष्ट्र का एजुकेशन हब कहा जाता है, वहीं हैदराबाद भारत के आईटी हब के रूप में विख्यात है. इससे दोनों राज्यों के बीच बेहतर नवाचार, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री के विकास में बढ़ावा मिलेगा.

हैदाबाद-बेंगलुरु

दक्षिण भारत के दो अहम राज्यों की राजधानियों को जोड़ने वाला यह रेल कॉरिडोर भारत के औद्योगिक इंजन को गति देने में अहम भूमिका निभायेगा. दोनों शहर देश के सबसे बड़े टेक हब के रूप में जाने जाते हैं. इनके बीच कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी होगी.

हैदराबाद-चेन्नई

हैदराबाद और चेन्नई दक्षिण भारत के दो महत्वपूर्ण शहर हैं. दोनों शहरों के बच यह फास्ट रेल कॉरिडोर ना सिर्फ कनेक्ट करेगा, बल्कि दोनों राज्यों के विकास को गति भी देगा. हैदराबाद जहां आईटी हब के रूप में जाना जाता है, तो वहीं चेन्नई अपनी तेज औद्योगिक गति और बंदरगाहों के लिए अलग पहचान रखता है.

चेन्नई-बेंगलुरु

इन दो प्रमुख शहरों के बीच तेज रेल कॉरिडोर बनने से कनेक्टिविटी बेहतर होगा.

दिल्ली-वाराणसी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी 2026) को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाने जाने वाले वाराणसी के बीच तेज रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है.

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वाराणसी-सिलीगुड़ी

यूपी के प्रमुख और पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक तेज रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है. इससे ना सिर्फ यूपी बल्कि, बिहार और बंगाल के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा.

-भारत एक्सप्रेस



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