Rishu Shri Tender Scam Bihar
Rishu Shri Tender Scam Bihar: बिहार की राजनीति में राजद सांसद सुधाकर सिंह ने टेंडर बम फोड़ दिया है. उन्होंने सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें रिशु श्री टेंडर मामले को लेकर बिहार सरकार से लेकर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाये.
सांसद सुधाकर सिंह ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर सहित 9 आईएएस अधिकारियों पर जमकर टेंडर लूटपाट करने का आरोप लगाया. उन्होंने आनंद किशोर को सबसे बड़ा माफिया करार दिया.
क्या लगाये हैं आरोप?
बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में शिक्षा विभाग में घोटाले आनंद किशोर के कार्यकाल में शुरु हुए. जिसके बाद पिछले 10 सालों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई.
बिहार में ED द्वारा IAS आनंद किशोर पर कथित रूप से लगाये गए आरोपों पर सरकार द्वारा किए जा रहे बचाव के मुद्दे पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में संबोधन… pic.twitter.com/TV3fsidCZK
— Sudhakar Singh (रोज़गार जहाँ, वोट वहाँ) (@_Sudhaker_singh) June 29, 2026
उन्होंने कहा कि टेंडर माफिया रिशु श्री को सबसे पहला टेंडर भी आनंद किशोर ने ही दिया था. जैसे बिहार में पहले टॉपर घोटाला हुआ, वैसा ही कुछ इस बार भी सामने आया है. कई गड़बड़ियों की शिकायतें इस साल भी हुई हैं.
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने दावा किया कि आनंद किशोर सबसे बड़ा माफिया है. जिसमें कई और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.
सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव दीपक कुमार को भी घोटालेबाज ठहरा दिया. उन्होंने दीपक कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वो भी आनंद किशोर को इन घोटालों में सहयोग दे रहे हैं. इसमें बिहार के कुल 9 आईएएस भी शामिल हैं.
बक्सर सांसद ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिये. तभी दूध का दूध और पानी का पानी हो पायेगा.
बिहार टेंडर घोटाला: ठेकेदार रिशु श्री के इर्द-गिर्द घूमती है पूरी कहानी
बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की कहानी ठेकेदार रिशु श्री के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है. इस मामले की शुरुआत साल 2023 के आसपास हुई थी, जब एक एफआईआर के जरिए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और अनियमितताओं की बात सामने आई. इसके बाद मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ गया और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदारों के कई ठिकानों पर छापेमारी की.
इन छापेमारियों के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के जेवरात और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए. जांच एजेंसियों को संदेह हुआ कि इस पूरे खेल में ठेकेदार रिशु श्री की कंपनियों और कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका हो सकती है. इसके बाद मामले की विस्तृत जांच की सिफारिश की गई.
ईडी के इनपुट के आधार पर विशेष निगरानी इकाई यानी एसवीयू ने 30 अप्रैल 2025 को ठेकेदार रिशु श्री, आईएएस संजीव हंस और अन्य लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया. रिशु श्री पर आरोप है कि उसने अफसरों के साथ मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की.
जांच में यह भी सामने आया कि रिशु श्री महज 7 से 8 साल में ही अकूत संपत्ति का मालिक बन गया. आरोप है कि टेंडर में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं के जरिए कमाए गए पैसों से उसने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पटना और बिहार के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में संपत्तियां खड़ी कीं.
रिशु श्री ऐसे हुआ गिरफ्तार
इस मामले में 27 मई को पटना के मीठापुर स्थित रिशु श्री के ठिकानों पर एसवीयू ने छापेमारी की थी. रेड के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए. इसके बाद रिशु श्री को गिरफ्तार कर लिया गया.
जांच के दायरे में कई अफसर भी आए. दो आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार को टेंडर प्रभावित करने और रिश्वत से जुड़े आरोपों में निलंबित कर दिया गया. आरोप है कि ये अधिकारी रिशु श्री के खर्चे पर विदेश यात्रा पर गए थे.
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अभिलाषा कुमारी शर्मा और रिशु श्री के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट से यह भी जानकारी सामने आई कि बीएमएसआईसीएल के एमडी रहे धर्मेंद्र सिंह ने भी कई विदेश यात्राएं की थीं. आरोप है कि इन यात्राओं के बाद रिशु श्री की कंपनी को टेंडर मिला. फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि टेंडर प्रक्रिया में किस स्तर पर और किन-किन लोगों की मिलीभगत से यह पूरा खेल किया गया.
-भारत एक्सप्रेस
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