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संकट में RJD! बिहार में बिगड़े हालात, राबड़ी आवास पर बवाल, अब क्या करेंगे तेजस्वी यादव?

RJD Crisis After Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के साथ ही सियासी पारा गरमाया हुआ है. टूट रहे यादव परिवार के खिलाफ राबड़ी आवास के सामने कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. ऐसे में तेजस्वी यादव अब क्या करेंगे?

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राबड़ी आवास के बाहर बवाल

RJD Crisis After Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के बाद पार्टी के अंदरूनी हालात बिगड़ गए हैं. हार का ठीकरा तेजस्वी यादव के सलाहकार और राज्यसभा सांसद संजय यादव पर फूटा है. सोमवार को राजद विधायक दल की बैठक के तुरंत बाद, लालू यादव के समर्थकों ने पहले राबड़ी देवी के आवास के बाहर जमकर हंगामा किया और फिर अंदर घुसकर लालू यादव की मौजूदगी में ही संजय यादव के खिलाफ नारेबाजी की.

अंदर और बाहर बवाल

राजद कार्यकर्ता खुले तौर पर पार्टी की दुर्गति के लिए संजय यादव (Tejashwi Yadv Advisor Sanjay Yadav) को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. कार्यकर्ताओं ने “हरियाणा जाओ” जैसे नारे लगाए, जिससे राबड़ी आवास के अंदर भी अफरातफरी का माहौल बन गया. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संजय यादव ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है और उनकी वजह से ही तेजस्वी ने सीट बंटवारे में कांग्रेस के साथ तालमेल ठीक से नहीं बैठाया और घटक दलों के बीच 11 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ को नहीं संभाल पाए.

दो दिन पहले, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने भी सोशल मीडिया पर संजय यादव पर हमला बोला था, जिसके बाद उन्होंने दावा किया था कि संजय का नाम लेने पर उन्हें गाली दी गई और चप्पल चलाया गया. वहीं विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई नेताओं ने संजय यादव पर पैसा लेकर टिकट काटने का आरोप लगाया था.

क्या करेंगे Tejashwi Yadv?

पार्टी के सबसे करीबी सलाहकार के खिलाफ परिवार और कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटने के बाद तेजस्वी यादव के सामने बड़ी चुनौती है. ऐसे में सवाल उठता है कि

  • क्या तेजस्वी हार की जिम्मेदारी लेते हुए संजय यादव को हटाकर पार्टी कार्यकर्ताओं के गुस्से को शांत करेंगे?
  • क्या वह अपने कोर वोट बैंक के बीच अपनी नेतृत्व क्षमता को स्थापित कर पाएंगे और अपनी बहन रोहिणी आचार्या के आरोपों का समाधान करेंगे?

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Tejashwi Yadv के सामने संकट

NDA के प्रमुख दलों को अपनी-अपनी सीटों पर औसतन 43% से अधिक वोट मिला, जबकि महागठबंधन दल 39% के अंदर सिमट गए. इसके बाद लालू परिवार की फूट सामने आ गए. ऐसे में तेजस्वी यादव के सामने के सामने यह संकट (Tejashwi Yadav leadership crisis) केवल हार का नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर विश्वास और आंतरिक लोकतंत्र को बहाल करने का है.



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