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हम अमेरिका या चीन नहीं, हम भारत हैं! स्वतंत्रता दिवस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को पढ़ाया पाठ

नागपुर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं और जेन-जी को संबोधित किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवा सही दिशा में नहीं चले तो भारत का ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ भविष्य में देश के लिए बोझ बन सकता है. उन्होंने भारत को विश्वगुरु बनाने का आह्वान भी किया.

Nagpur Mohan Bhagwat RSS Independence Day

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नागपुर में युवाओं को एक बेहद अहम और कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने देश की युवा आबादी (Gen-Z) को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर इस ताकत को सही दिशा नहीं मिली, तो भविष्य में यह देश के लिए एक बड़ा ‘बोझ’ और चुनौती बन सकती है. भागवत ने साफ किया कि, “हम अमेरिका या चीन नहीं, हम भारत हैं… हमें अपनी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए.”

‘युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी’

नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में तिरंगा फहराने और कस्तूरचंद पार्क में युवाओं से संवाद करते हुए भागवत ने कहा कि भारत को मिला ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (Demographic Dividend) तभी देश के काम आएगा, जब युवाओं को सही उद्देश्य मिले. उन्होंने कहा, “आज का युवा 30 साल बाद बूढ़ा हो जाएगा. इसलिए उसे केवल अपने भविष्य की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य की भी चिंता करनी चाहिए. अगर युवा सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे और समाज से कट जाएंगे, तो यह जनसांख्यिकीय ताकत हमारे लिए ही खतरा बन जाएगी.”

समझाया एकता का पाठ

मोहन भागवत ने भारतीय संविधान और संस्कृति की मर्यादा पर जोर देते हुए तिरंगे का बहुत गहरा अर्थ समझाया. उन्होंने कहा कि केसरिया रंग कर्म, ज्ञान और त्याग का, सफेद रंग पवित्रता और अनुशासन का और हरा रंग समृद्धि का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग विचार होना गलत नहीं है. अशोक चक्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “चक्र में कई तीलियां हैं, लेकिन सभी एक ही केंद्र से निकलती हैं. इसी तरह, हमारे विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारी एकता बनी रहनी चाहिए.”

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‘विश्वगुरु’ बनने में हैं कई चुनौतियां

अपने संबोधन के अंत में संघ प्रमुख ने भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का आह्वान किया. उन्होंने माना कि कई ऐसी ताकतें हैं जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोकना चाहती हैं और हमारे रास्ते में लगातार बाधाएं पैदा कर रही हैं. लेकिन उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इन चुनौतियों का डटकर सामना करना होगा और अपने मूल सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. भागवत का यह स्पष्ट संदेश था कि जब देश सुरक्षित और प्रतिष्ठित होगा, तभी नागरिकों को भी सच्ची सुरक्षा और सम्मान मिल पाएगा.



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