दिल्ली के मानसरोवर गार्डन के श्री सनातन धर्म मंदिर, सी ब्लॉक में संस्कृत भारती संस्था की ओर से आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम में विद्यालय एवं महाविद्यालय के कई छात्रों ने संस्कृत की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं. कार्यक्रम में राजधानी महाविद्यालय, शिवाजी महाविद्यालय, दिल्ली पब्लिक स्कूल आर के पुरम, साधु वासवानी विद्यालय, कार्मेल कान्वेंट विद्यालय, होली चाइल्ड, न्यू एरा, टैगोर पब्लिक स्कूल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्याल, जाकिर हुसैन महाविद्यालय, जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय समेत करीब 15 स्कूलों के छात्रों ने हिस्सा लिया. इसमें छात्रों ने भजन, श्लोक, स्तोत्र, गीत, कथा, योग, नृत्य सभी कुछ संस्कृत में पेश किए.
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित अतिथियों में डॉ. देवकी नंदन (प्रांत मंत्री संस्कृत भारती दिल्ली), जयप्रकाश गुलाटी (मोती ज़िला संघचालक), हर गोपाल (प्रधान सनातन धर्म मंदिर), अंकुर गर्ग (कोषाध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद), डॉक्टर प्रणव देव (जिलाध्यक्ष जनक ज़िला संस्कृत भारती), रमेश लड्डा एवं किरण लड्डा (प्रसिद्ध व्यवसायी एवं समाज सेवी) शामिल थे.

DPS आर के पुरम के साद्यांत कौशल ने अपने साथियों के साथ दी प्रस्तुति
कार्यक्रम में डीपीएस आर के पुरम के साद्यांत कौशल ने अपने साथियों भुवनेश, प्रणव और डेलीना के साथ वीणा वादिनी मां सरस्वती के विद्या सम्बंधित संस्कृत के श्लोक एवं विष्णु स्तोत्र प्रस्तुत किया. बच्चों की इस शानदार प्रस्तुति ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. हॉल में बैठे लोगों ने कई बार तालियों से उनका उत्साहवर्धन भी किया.

बच्चों ने एक के बाद एक कर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए
कार्यक्रम में बच्चों ने एक के बाद एक कर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनमें देशभक्ति के गाने की धुन पर योग भी प्रस्तुत किया गया. जिसने दर्शकों को आने वाले 15 अगस्त की याद दिला दी. योग प्रस्तुति देखकर दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं.
“जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्” है मूल मंत्र
संस्कृत भारती संस्था “जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्” को मूल मंत्र मान कर अभियान चला रही है. संस्कृत एक मृत भाषा नहीं, अपितु अमृत भाषा है. भारत में आज भी 8 लाख लोग पूर्ण संस्कृत में बात करते हैं. संस्कृत ज्ञान परंपरा है.
यह एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था है. इसका मकसद संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार करना है और यह सामाजिक एकता के आदर्श से साम्य रखती है. संस्कृत भारती की स्थापना 1981 में की गई थी. इसका उद्देश्य सरल संवादात्मक संस्कृत को जनभाषा बनाना, घरों में संस्कृत का प्रयोग बढ़ाना और संस्कृत माध्यम में शिक्षण तथा इसके साहित्य और ज्ञान की पहुंच जन-जन तक सुनिश्चित करना है.
1994 में दिल्ली में शुरू हुआ था संस्कृत भारती का कार्य
संस्कृत भारती का कार्य 1994 में दिल्ली में शुरू हुआ. संस्थान “संस्कृत संभाषण शिविर” आयोजित करता है, जिनमें आम जन को भाषा बोलने के लिए प्रेरित किया जाता है. आंकड़ों के अनुसार 1998 तक लगभग 29 लाख लोग संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भाग ले चुके थे. वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया, यूके, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अन्य 27 देशों में संस्कृत शिक्षण एवं प्रचार कार्य चल रहे हैं.
देश के आठ गाँव की व्यापारिक भाषा आज भी संस्कृत है और वहाँ हजारों घर संस्कृतमय हैं. संस्था की ओर से अब तक 40 देशों के 20,370 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. संस्था ने अब तक एक विश्व सम्मेलन और पाँच प्रांत सम्मेलनों का आयोजन किया है.
यह संस्था का प्रयास ही है कि अब तक भारत की संसद में 71 सांसदों ने संस्कृत में शपथ ग्रहण की. संस्कृत शिव गुरु की ओर से 1,39,500 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और संस्था अब तक 7 हजार संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर तैयार कर चुकी है. इस तरह से संस्कृत भारती संस्था का मकसद आज जमीन पर सार्थक होता दिख रहा है.
– भारत एक्सप्रेस
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