सुप्रीम कोर्ट ने यति नरसिंहानंद द्वारा धर्म संसद के खिलाफ कदम नही उठाने के उत्तर प्रदेश प्रशासन और पुलिस के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है.
सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि हम अवमानना याचिका पर सुनवाई नही कर रहे है. आप अधिकारियों से संपर्क करें. जिसपर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने प्रशांत भूषण ने कहा कि वह अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश किए थे.
घटना की रिकॉर्डिंग होनी चाहिए
सीजेआई ने एएसजी नटराजन से कहा कि कृपया जो हो रहा है, उस पर नजर रखें, घटना की रिकॉर्डिंग वहां होनी चाहिए. सीजेआई संजीव खन्ना ने याचिकाकर्ता से कहा कि सभी मामले सुप्रीम कोर्ट नही आ सकते, अगर मैं एक का मंजूरी देता हूं तो मुझे सभी को स्वीकार करना होगा.
इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि इस बात की संभावना है कि वहां मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ बातें होंगी. यह याचिका रिटायर्ड आईएएस अरुणा रॉय, रिटायर्ड आईएफएस अशोक कुमार शर्मा, देब मुखर्जी और नवरेखा शर्मा, पूर्व योजना आयोग के सदस्य और NCWV प्रमुख सैयदा हमीद और सामाजिक शोधकर्ता और नीति विश्लेषक विजयन एम जे की ओर से दायर की गई थी.
मुसलमानों के खिलाफ नफरती भाषण
भूषण ने कहा था कि मुसलमानों के खिलाफ नफरती भाषण दिए जा रहे है. याचिका में कहा गया था कि गाजियाबाद जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश पुलिस ने नफरत भरे भाषणों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन करने में विफल रही है.
17 -18 दिसंबर को हुआ था धर्म संसद का आयोजन
इससे पहले उत्तराखंड के हरिद्वार में धर्म संसद का आयोजन किया गया था, जिसमें कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण दिए जाने के कारण विवाद खड़ा हो गया था. इस मामले में यति नरसिंहानंद सहित अन्य के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया गया. दो साल पहले भी गाजियाबाद के शिवशक्ति धाम मंदिर में 17 -18 दिसंबर को धर्म संसद का आयोजन करने का प्रयास किया गया था, लेकिन पुलिस ने पहले धर्म संसद के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण को देखते हुए आयोजन की अनुमति नही दी थी.
धर्म संसद को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त
बता दें कि धर्म संसद को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले से ही सख्त है. कोर्ट ने कहा हरिद्वार धर्म संसद को लेकर कहा था कि अगर धर्म संसद में भड़काऊ भाषण को रोका नहीं गया तो इसके लिए राज्य के अधिकारी जिम्मेदार होंगे. वही दिसंबर 2021 के दिल्ली धर्म संसद मामले में जांच अधिकारी से पूछा था कि धर्म संसद 19 दिसंबर 2021 को हुई थी तो इसके 5 महीने बाद केस क्यों दर्ज किया गया था और इस मामले में कितनों को गिरफ्तार किया गया.
इसे भी पढ़ें- दिल्ली HC ने मकोका मामले को द्वारका कोर्ट से Rouse Avenue Court में ट्रांसफर करने का दिया आदेश
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


