Mohsina Kidwai death Congress leader: भारतीय राजनीति की कद्दावर नेता और कांग्रेस की वरिष्ठतम स्तंभों में से एक मोहसिना किदवई का बुधवार सुबह निधन हो गया. 94 वर्षीय किदवई पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाली मोहसिना जी ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसी दिग्गज शख्सियतों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था.
आज शाम दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार
कांग्रेस पार्टी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, मोहसिना किदवई ने आज सुबह 4 बजे अंतिम सांस ली. उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके नोएडा सेक्टर-40 स्थित आवास पर रखा गया है. दोपहर 3 बजे उनके निवास से अंतिम यात्रा शुरू होगी, जिसके बाद शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली के ऐतिहासिक निजामुद्दीन कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
इंदिरा और राजीव की कैबिनेट का प्रमुख चेहरा
मोहसिना किदवई का राजनीतिक कद इस बात से समझा जा सकता है कि वे देश की दो सबसे शक्तिशाली सरकारों का हिस्सा रहीं. 1984 में इंदिरा गांधी की सरकार में उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम किया. इसके बाद राजीव गांधी के कार्यकाल (1984-89) में उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली. वे मेरठ से तीन बार लोकसभा सांसद चुनी गईं और 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य भी रहीं.
संगठन की ‘रीढ़’ और हज कमेटी की अध्यक्ष
संसदीय राजनीति के अलावा, किदवई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की महासचिव और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की महत्वपूर्ण सदस्य रहीं. प्रशासनिक स्तर पर उन्होंने हज कमेटी की अध्यक्ष के रूप में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए अभूतपूर्व सुधार किए. उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उनका गहरा प्रभाव था, जहाँ वे प्रदेश सरकार में मंत्री और विधानसभा सदस्य के रूप में सक्रिय रहीं.
पार्टी नेताओं ने जताया गहरा शोक
कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एक समर्पित नेता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध व्यक्तित्व के रूप में याद किया है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि मोहसिना जी का जाना केवल कांग्रेस के लिए नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उन्होंने अपना पूरा जीवन धर्मनिरपेक्षता और समावेशी राजनीति के आदर्शों को समर्पित कर दिया. आज शाम उनके अंतिम संस्कार में कई बड़े राजनेताओं के शामिल होने की संभावना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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