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बुझ गया आदिवासी आंदोलन का दीपक! कौन थे शिबू सोरेन जिन्होंने झारखंड बनाने में निभाई अहम भूमिका?

Shibu Soren: सोरेन ने 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली. लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के चलते 9 दिनों के अंदर इस्तीफा देना पड़ा. अगस्त 2008 से जनवरी 2009 तक फिर मुख्यमंत्री रहे.

Shibu Soren

Shibu Soren: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का आज 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी की वजह से दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया. वे 81 साल के थे. शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन बिहार हजारीबाग जिले के नामरा गांव (अब झारखंड) में हुआ था. जल-जंगल-जमीन की राजनीति करने वाले शिबू सोरेन की पहचान एक बड़े आदिवासी नेता के तौर पर होती है.

शिबू सोरेन के राजनीतिक करियर में संघर्षों के साथ-साथ विवाद भी रहे. 1974 और 1975 की घटनाओं (जिसमें अनेक लोग मारे गए) से जुड़े आपराधिक आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तारियां झेलनी पड़ीं. हालांकि 2008 और 2010 में उन्हें कुछ मामलों में बरी कर दिया गया. 1994 से संबंधित एक हत्या मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था और केंद्रीय मंत्री पद छोड़ना पड़ा, लेकिन बाद में इस मामले में भी उन्हें जीत मिली.

शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा

शिबू सोरेन का जन्म तत्कालीन बिहार (अब झारखंड) के संथाल समुदाय में हुआ था. जब वे छात्र थे, तभी उनके पिता की हत्या कर दी गई. जिसके चलते घर-परिवार चलाने के लिए उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ गया. सोरेन की पहली राजनीतिक शुरुआत 1970 में शुरू हुआ. जब वे आदिवासी जमीनों को बाहरी लोगों के चंगुल से छुड़ाने में शामिल हुए. जल्द ही उनकी पहचान एक बड़े आदिवासी नेता के तौर पर होने लगी.

1973 में झारखंड मुक्ति मोर्चा आंदोलन की शुरुआत की

1973 में शिबू सोरेन ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा आंदोलन की शुरुआत की. जिसका मुख्य उद्वेश्य मौजूदा बिहार के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों को मिलाकर एक अलग राज्य झारखंड बनाना था. जो 2000 में हासिल भी हो गया.

राजनीतिक कैरियर की शुरुआत

शिबू सोरेन राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दोनों तरह की राजनीति में सक्रिय रहे. उन्होंने 1977 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन वो हार गए. हालांकि 3 साल बाद 1980 में फिर चुनाव हुआ. जिसमें उन्होंने जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 1989, 1991, 1996 और 2004 में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की.

2004 में पहली बार केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री बने

2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद भी शिबू सोरेन को वो सफलता नहीं मिली. जिसकी वो उम्मीद कर रहे थे. अपनी संभावनाओं को बरकरार रखने के लिए उन्होंने कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी के साथ गठबंधन किया. साल 2004 में उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व में लोकसभा का चुनाव लड़ा. चुनाव में जीत मिलने के बाद उनको कोयला और खान मंत्रालय मिला. हालांकि 1975 में हुई हिंसा के मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया. जिसकी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. सोरेन को तब 1 महीना न्यायिक हिरासत में बिताना पड़ा. नवंबर 2004 में जब वो जमानत पर रिहा हुए. तब फिर से उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली.

3 बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री

सोरेन ने 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली. लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के चलते 9 दिनों के अंदर इस्तीफा देना पड़ा. अगस्त 2008 से जनवरी 2009 तक फिर मुख्यमंत्री रहे, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के कारण इस्तीफा देना पड़ा. तीसरी बार दिसंबर 2009 से मई 2010 तक मुख्यमंत्री रहे, जब भाजपा ने समर्थन वापस लिया और सरकार गिर गई.

इस तरह, वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन सभी राजनीतिक अस्थिरता की वजह से उन्होंने कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया.

ये भी पढ़ें- झारखंड के पूर्व सीएम शीबू सोरेन का निधन, 81 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, पीएम मोदी ने जताया शोक

1974-75 में क्या हुआ था?

शिबू सोरेन पर राजनीतिक संघर्षों के साथ-साथ हिंसक गतिविधियों के आरोप भी लगते रहे हैं. इन्हीं में से एक 1974 का मामला है. जिसमें बताया गया कि एक भोज के लिए बकरे की बलि को लेकर विवाद हो गया था. जिसके बाद शिबू सोरेन ने एक भीड़ का नेतृत्व करते हुए 2 लोगों की हत्या कर दी.

इसके अलावा 1975 के एक और मामले में उनका नाम आता है. जिसमें बताया जाता है कि, 1975 में शिबू सोरने ने एक भीड़ का नेतृत्व करते हुए एक मुस्लिम बहुल गांव पर हमला किया गया. इस हमले में आदिवासियों की भीड़ ने कई लोगों की हत्या कर दी. मृतकों में कई लोगों की हत्या तीर लगने की वजह से भी हुई थी. इस हमले में कई लोग मारे गए थे. हालांकि इन मामलों में शिबू सोरेन बरी हो गए थे.

झारखंड बनाने में निभाई अहम भूमिका

शिबू सोरेन को आदिवासी राजनीति का मार्गदर्शक माना जाता है. उन्होंने झारखंड में JMM को एक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई. जिसकी वजह से बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बना.

फिलहाल उनके पुत्र हेमंत सोरेन ने उनकी राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाई है और वर्तमान में वे झारखंड के मुख्यमंत्री हैं.

– भारत एक्सप्रेस



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