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‘अखंडता के लिए बलिदान…’, पीएम मोदी ने क्यों कहा-डॉ. मुखर्जी का विज़न दिखाएगा ‘विकसित भारत’ का रास्ता?

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्र निर्माण और अखंड भारत के लिए उनके योगदान को याद किया. पीएम ने संस्कृत श्लोक साझा कर कहा कि महान राष्ट्रसेवियों की कीर्ति अमर रहती है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती है.

Dr. Syama Prasad Mookerjee Jayanti: स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे महान राष्ट्र-निर्माताओं में शुमार और जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज 125वीं पावन जयंती है. इस बेहद ऐतिहासिक और गौरवमयी मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नमन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दो बेहद शक्तिशाली और संदेशपरक ट्वीट साझा किए हैं. पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी को भारत की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाला एक ऐसा महानायक बताया है, जिनका विज़न आज भी ‘विकसित भारत 2047’ के हमारे संकल्प का मार्ग आलोकित कर रहा है.

पीएम मोदी के इन ट्वीट्स ने न सिर्फ डॉ. मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व को देश के सामने रखा है बल्कि एक विशेष संस्कृत श्लोक के जरिए राष्ट्रवाद और अमरता का वो गहरा संदेश भी दिया है जो आज इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है.

 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बहुआयामी योगदान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले विस्तृत संदेश में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के उन अनछुए और महान पहलुओं को देश के सामने रखा, जो उन्हें एक साधारण नेता से बहुत ऊपर उठाकर एक महान राष्ट्र-निर्माता बनाते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन उच्च विद्वत्ता, अदम्य साहस और राष्ट्रीय सेवा के प्रति एक अटूट समर्पण की जीती-जागती मिसाल था. वह एक उत्कृष्ट विचारक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने हमेशा नवाचार (Innovation) और भविष्य की सोच वाली शिक्षा का पुरजोर समर्थन किया.

इसके साथ ही स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने देश में औद्योगिक आत्मनिर्भरता की वो मजबूत नींव रखी, जिसने पारंपरिक क्षेत्रों और लोगों की आजीविका को फलने-फूलने का मौका दिया. बंगाल के भीषण अकाल के दौरान उनके द्वारा किए गए मानवीय प्रयास पीड़ितों के प्रति उनकी गहरी करुणा को दर्शाते हैं. देश की एकता और संप्रभुता के लिए उनका दृढ़ संकल्प आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है.

भारत के स्वाभिमान के लिए सर्वोच्च बलिदान

अपने दूसरे प्रभावशाली ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस ऐतिहासिक और सर्वोच्च बलिदान को रेखांकित किया, जिसने भारत के नक्शे और तकदीर को बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. पीएम मोदी ने साफ शब्दों में लिखा कि भारतवर्ष की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जो बलिदान दिया था, वह देश की हर आने वाली पीढ़ी को हमेशा राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा.

गौरतलब है कि ‘एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे’ का नारा देकर कश्मीर की अखंडता के लिए संघर्ष करने वाले डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए समर्पित था. पीएम मोदी का यह बयान सीधे तौर पर यह संदेश देता है कि आज देश जिस मजबूती के साथ अपनी सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा कर रहा है, उसकी वैचारिक शुरुआत डॉ. मुखर्जी के इसी महान बलिदान से हुई थी.

 

श्लोक के जरिए अमरता और राष्ट्रवाद का महा-संदेश

इस पूरी जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किया गया संस्कृत का एक विशेष श्लोक सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है, जिसे पीएम मोदी अक्सर अपने खास संदेशों में शामिल करते हैं. पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि “जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः. नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥” इस कालजयी श्लोक का बेहद गहरा अर्थ यह है कि वे पुण्य आत्माएं, जिन्होंने समाज और राष्ट्र के लिए महान और पवित्र कार्य किए हैं, वे हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं. उनके ‘यश रूपी शरीर’ (उनकी कीर्ति और उनके कार्यों) को कभी भी बुढ़ापे या मृत्यु का कोई डर नहीं होता है.

 

इस श्लोक के माध्यम से पीएम मोदी ने देश को यह समझाया है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच मौजूद न हों, लेकिन भारत की एकता और अखंडता के रूप में उनका जो ‘यश रूपी शरीर’ खड़ा है, वह हमेशा अमर रहेगा और समय की कोई भी आंधी उनके राष्ट्रवाद के विचारों को कभी मिटा नहीं पाएगी.

-भारत एक्सप्रेस



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