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सिमरिया में ‘मौत के सौदागरों’ का साम्राज्य ध्वस्त, सुनसान घर से 42 पेटी जहरीला सिरप बरामद!

झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया में प्रशासन ने प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद कर नशे के कारोबार का पर्दाफाश किया है. एक सुनसान घर से 42 पेटियां जब्त की गईं, जिससे अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह की आशंका गहराई है.

Poisonous Syrup
Edited by Vaibhav Gupta

झारखंड के चतरा जिले में नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई के बीच सिमरिया से जो खबर सामने आई है, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. शराब माफिया और अफीम तस्करी की कहानियां तो यहां आम हैं, लेकिन इस बार मामला कहीं ज्यादा खतरनाक और डरावना निकला. प्रशासन ने जिस जहर की खेप पकड़ी है, वह वही प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप है, जिसे पीकर देश के कई हिस्सों में मासूम जानें जा चुकी हैं.

सुनसान घर बना मौत का गोदाम

यह पूरा मामला सिमरिया थाना क्षेत्र के कटिया तुमा पत्रा गांव का है. अंचलाधिकारी गौरव कुमार राय को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के एक पुराने और लंबे समय से बंद पड़े खपरैल मकान में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं. सूचना मिलते ही उन्होंने भारी पुलिस बल के साथ उस मकान को चारों तरफ से घेर लिया. यह घर हितामन गंझू का बताया जा रहा है और बाहर सड़क की ओर ‘लिंक’ कंपनी का मजबूत ताला लटका हुआ था.

परिजनों की मौजूदगी में जब ताला तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा देख अधिकारी भी हैरान रह गए. अनाज या घरेलू सामान की जगह वहां कोडीन युक्त कफ सिरप की 42 बड़ी पेटियां करीने से छिपाकर रखी गई थीं. यह वही सिरप है, जिस पर सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है और जिसे नशे के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

युवाओं को नशे में धकेलने की साजिश

हाल के दिनों में झारखंड के कोडरमा में इसी सिरप के सेवन से एक बच्चे की मौत ने पूरे राज्य को हिला दिया था. इसके बावजूद तस्कर बेखौफ होकर इस जहर का कारोबार चला रहे थे. सिमरिया इलाके में पहले से गांजा, अफीम और ब्राउन शुगर का चलन था, लेकिन अब यह सिरप भी युवाओं के बीच तेजी से फैल रहा था. महज 200 रुपये अंकित मूल्य वाला यह सिरप ऊंचे दामों पर बेचकर तस्कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे.

वहीं, मौके पर पहुंचे सिमरिया इंस्पेक्टर सनोज चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि सिमरिया की धरती पर मौत का कारोबार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है. उन्होंने बताया कि इस मामले में तीन मुख्य तस्करों समेत उनके नेटवर्क की पहचान कर ली गई है. प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे.

अंतरराज्यीय गिरोह की आशंका

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी खेप सिमरिया तक पहुंची कैसे? क्या इसके तार बिहार या बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों से जुड़े हैं? जिस तरीके से एक सुनसान घर को गोदाम में बदला गया, उससे साफ है कि इसके पीछे किसी शातिर सिंडिकेट का हाथ है. फिलहाल एसआई चंद्रमोली कुमार, राजू कुमार और सशस्त्र बल पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहे हैं.

अंचलाधिकारी गौरव कुमार राय और सिमरिया पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई ने नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है. लेकिन असली चुनौती अब भी बाकी है—इस काले धंधे को चलाने वाले उन ‘सफेदपोश’ चेहरों तक पहुंचना, जो पर्दे के पीछे बैठकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं. सिमरिया के युवाओं को इस जहर से बचाना अब प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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