UP Assembly Elections 2027: कांग्रेस के सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद इन दिनों समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगातार निशाना साध रहे हैं. उनके बयानों से यूपी में इंडिया गठबंधन के भीतर खींचतान बढ़ गई है. सपा नेताओं में नाराजगी साफ दिख रही है वहीं कांग्रेस की यूपी और दिल्ली इकाई इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है.
मसूद की राजनीतिक यात्रा
इमरान मसूद की पहचान एक ऐसे नेता के तौर पर है जो कई बार दल बदल चुके हैं. 2014 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी जिसके बाद उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर होती चली गई. 2014, 2017 और 2019 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2022 में वे सपा में गए लेकिन टिकट नहीं मिला फिर बीएसपी में भी किस्मत नहीं चमकी. अंततः 2024 के चुनाव से पहले वे कांग्रेस में लौटे और इंडिया गठबंधन की मदद से सहारनपुर सीट जीतने में सफल रहे.
अखिलेश पर मसूद के हमले
13 जुलाई को मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव मुस्लिम नेताओं को पसंद नहीं करते और गठबंधन की जरूरत सपा को ज्यादा है. उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में सपा की जीत गठबंधन की वजह से ही संभव हुई. 22 जून को उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश को राम मंदिर का मुद्दा दिखता है लेकिन मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार नहीं दिखते. मसूद ने कहा कि सपा मुसलमानों से सिर्फ वोट लेना जानती है.
कांग्रेस के भीतर मसूद की स्थिति
मसूद लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के कामकाज से अच्छी तरह वाकिफ हैं. कांग्रेस में टिकट और गठबंधन पर अंतिम फैसला हाईकमान करता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मसूद आखिर किसके इशारे पर अखिलेश यादव के खिलाफ बोल रहे हैं.
अजय राय ने क्या कहा?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मसूद को वरिष्ठ नेता बताया और उनके बयान से सहमति जताई. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन पर अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा. इससे साफ है कि मसूद के बयान को पार्टी के भीतर कुछ समर्थन भी मिल रहा है.
प्रियंका गांधी से जुड़ाव
इमरान मसूद को कांग्रेस में प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है. फिलहाल प्रियंका यूपी की राजनीति से दूर हैं इसी वजह से पार्टी मसूद को लेकर असमंजस में है. कोई भी नेता उनके खिलाफ खुलकर कदम उठाने की स्थिति में नहीं है.
ये भी पढ़ें-क्या कोर्ट तुड़वाएगी सोनम वांगचुक का अनशन? हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई
गठबंधन और सीट बंटवारे की जंग
असल विवाद सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर है. कांग्रेस चाहती है कि इन मुद्दों को जल्द सुलझाया जाए क्योंकि फरवरी 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. अब चुनाव में सिर्फ सात महीने का वक्त बचा है और ऐसे में मसूद के बयान गठबंधन की राह और मुश्किल बना सकते हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



