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जयपुर के SMS हॉस्पिटल में महा-चमत्कार! मरीज की धड़कनें रोककर कर डाली ऐसी हार्ट सर्जरी, पूरी दुनिया को चौंकाया

राजस्थान के SMS अस्पताल के डॉक्टरों ने 8 घंटे लंबे दुर्लभ ऑपरेशन में एक मरीज की तीन जटिल हार्ट सर्जरी एक साथ सफलतापूर्वक पूरी कर मेडिकल इतिहास रच दिया. भारत में पहली बार हुए इस ऑपरेशन को विशेषज्ञ विश्वस्तर पर भी बेहद दुर्लभ मान रहे हैं, जबकि मरीज का इलाज सरकारी योजना के तहत मुफ्त हुआ…

Edited by Rohit Agrawal

SMS Hospital Triple Heart Surgery: राजस्थान के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक नया इतिहास रच दिया है. दरअसल अस्पताल के सीटीवीएस (CTVS) विभाग के एचओडी डॉ. अनील शर्मा के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने लगातार 8 घंटे चले एक अत्यंत जटिल और जानलेवा ऑपरेशन में एक ही मरीज की तीन गंभीर हार्ट सर्जरी को एक साथ सफलतापूर्वक अंजाम दिया है.

चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह का कंबाइंड (संयुक्त) ऑपरेशन पूरे विश्व में अब तक 10 से भी कम बार रिपोर्ट हुआ है, जबकि भारत के चिकित्सा इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि निजी अस्पतालों में लाखों रुपये में होने वाला यह इलाज राजस्थान सरकार की योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त हुआ है.

क्या थी मरीज की वो तीन जानलेवा बीमारियां?

अस्पताल में भर्ती मरीज एक साथ दिल की तीन बेहद खतरनाक और जन्मजात बीमारियों से जूझ रहा था. उसे ‘कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा’ (महाधमनी का अत्यधिक सिकुड़ जाना) की समस्या थी, जिसके साथ उसका मुख्य हार्ट वाल्व और महाधमनी का ‘एन्यूरिज्म आर्च’ (Aneurysm Arch) भी पूरी तरह खराब हो चुका था.

डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि अगर तुरंत सर्जरी नहीं की जाती, तो अगले एक साल के भीतर उसकी मौत का खतरा 80% से भी ज्यादा था. अलग-अलग ऑपरेशन करने पर बार-बार जान का जोखिम था, इसलिए डॉक्टरों ने एक ही बार में सबसे बड़ा जुआ खेलने का फैसला किया.

कैसे हुई 8 घंटे की सर्जरी?(SMS Hospital Triple Heart Surgery)

इस 8 घंटे लंबे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम ने मेडिकल साइंस के तीन सबसे जटिल प्रोसीजर एक साथ पूरे किए:

Bentall प्रोसीजर: इसके तहत खराब हो चुके वाल्व और महाधमनी को पूरी तरह हटाकर एक कृत्रिम (Artificial) ग्राफ्ट लगाया गया और दिल की नसों को दोबारा जोड़ा गया.

Total Arch Replacement: महाधमनी के पूरे आर्च को बदला गया. इसके लिए मरीज के शरीर के तापमान को 20°C तक नीचे गिराया गया और पूरे 32 मिनट तक शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को पूरी तरह रोक दिया गया. इस दौरान मरीज के दिमाग (Brain) को डेड होने से बचाने के लिए एक अलग लाइफ-सपोर्ट सिस्टम से खून पहुंचाया गया.

COA Repair: अंत में महाधमनी के सिकुड़े हुए हिस्से को काटकर नया आर्च ग्राफ्ट सफलतापूर्वक फिट किया गया.

डॉक्टरों के हौसले के आगे हारा यमराज

यह केस डॉक्टरों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. चिकित्सा विज्ञान के नियमों के अनुसार, इन तीनों ऑपरेशनों को एक साथ करने पर मरीज की जान जाने का खतरा (Mortality Risk) सामान्य से 62% ज्यादा बढ़ गया था. लेकिन एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों की कार्यकुशलता और सटीक कॉर्डिनेशन ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया. ऑपरेशन के दौरान मरीज को 6 यूनिट खून चढ़ाया गया.

बता दें कि सफल सर्जरी के बाद मरीज को 14 घंटे तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी के बाद तीसरे ही दिन उसे सीधे आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. अब मरीज पूरी तरह रिकवर हो चुका है, अपने पैरों पर चल-फिर रहा है और उसे एक नई जिंदगी मिल चुकी है.

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‘भामाशाह योजना’ बनी मसीहा

सबसे बड़ी बात ये रही कि इस बेहद महंगे और दुनिया के सबसे दुर्लभ इलाज के लिए गरीब मरीज को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा. दरअसल राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना के तहत यह पूरा ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त (Cashless) किया गया.

इस ऐतिहासिक सफलता को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. अनील शर्मा के साथ डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. सौरभ मित्तल, डॉ. वक्ता राम चौधरी, डॉ. गौरव, डॉ. प्रीतांशी, डॉ. राकेश, डॉ. कुलराज, डॉ. सूरज, एनेस्थेटिस्ट डॉ. रीमी मीना, डॉ. अंजुम, डॉ. अरुण और परफ्यूजनिस्ट प्रांजलि, पुलकित, आरती के साथ नर्सिंग इंचार्ज सुधा जी और उनकी पूरी टीम शामिल रही, जिनकी बदौलत भारत ने आज वैश्विक चिकित्सा पटल पर अपना डंका बजा दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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