पीएम मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक कर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) को नई ऊर्जा दे दी. वैदिक मंत्रों के बीच हुई पूजा-अर्चना ने पूरे मंदिर परिसर को भक्ति से भर दिया. यह दौरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक भी है. मोदी ने मंदिर की प्राचीन महिमा को याद दिलाते हुए कहा कि सोमनाथ भारत की आत्मा का केंद्र है. 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं बल्कि इतिहास, वास्तुकला और आस्था का जीता-जागता प्रमाण है. आइए जानते हैं वो खास बातें जो इसे दुनिया में सबसे अनोखा बनाती हैं.
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प्रथम ज्योतिर्लिंग और चंद्रदेव की क्या है स्टोरी?
दरअसल सोमनाथ को 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान मिला हुआ है. यह स्थान प्रभास तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति के लिए चंद्रदेव (सोम) ने यहां भगवान शिव की घोर तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने चंद्र को पुनर्जीवन दिया और इसी कारण इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा जिसका अर्थ है चंद्रमा के स्वामी. हर साल लाखों श्रद्धालु इसी कथा के कारण यहां स्नान और दर्शन के लिए आते हैं.
भव्य वास्तुकला के साथ स्वर्णिम आभा
वर्तमान सोमनाथ मंदिर चालुक्य शैली की वास्तुकला का अनुपम नमूना है. मंदिर का शिखर 150 फीट ऊंचा है. सबसे ऊपर 10 टन का विशाल कलश स्थापित है. पूरा परिसर 1,666 स्वर्ण-मंडित कलशों से जगमगा रहा है. ध्वजा 27 फीट ऊंची है जो दूर समुद्र से भी दिखाई देती है. मंदिर तीन मुख्य हिस्सों में बंटा है. गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप. इनकी बारीक नक्काशी भारतीय संस्कृति की झलक दिखाती है.
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बाण स्तम्भ और कपिल कुंड की खासियत
मंदिर के दक्षिण में बाण स्तम्भ खड़ा है. इस पर संस्कृत शिलालेख है जो कहता है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक कोई भूभाग नहीं है. यह भारत का दक्षिणी छोर माना जाता है. मंदिर के पास कपिल कुंड है. कपिल मुनि द्वारा स्थापित यह कुंड स्नान के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. अखंड ज्योति भी मंदिर की विशेषता है जो शिव के स्थायी स्वरूप का प्रतीक है. ये सभी तत्व मिलकर सोमनाथ को अनोखा बनाते हैं.
हर साल लाखों श्रद्धालुओं का आना
सोमनाथ हर साल करीब 92 से 97 लाख श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं. मंदिर समुद्र तट पर स्थित होने के कारण सागर की लहरों की गूंज और मंदिर की घंटियां एक साथ बजती हैं. यह दृश्य और ध्वनि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव देती है. पीएम मोदी का जलाभिषेक इस बार के स्वाभिमान पर्व को और भी खास बना गया. मोदी ने कहा कि सोमनाथ भारत की आत्मा है. यह दौरा धार्मिक भावना के साथ-साथ सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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