Meghalaya honeymoon murder case
Meghalaya Honeymoon Murder: मेघालय के बहुचर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई एक बड़ी तकनीकी और कानूनी चूक के कारण आरोपी को यह राहत मिली, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा. इस लूपहोल के सामने आने के बाद अब पुणे पुलिस भी अपने यहां के हाई-प्रोफाइल केतन अग्रवाल मर्डर केस को लेकर अत्यधिक सावधानी बरत रही है, ताकि सबूतों के अभाव और कानूनी कमियों का फायदा उठाकर आरोपी सिया गोयल बच न निकले.
यह पूरा मामला दो अलग-अलग हाई-प्रोफाइल मर्डर केसों की कड़ियों को आपस में जोड़ता है. साल 2025 में हुए मेघालय हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के दस्तावेजों में हत्या (धारा 103(1)) की जगह धोखाधड़ी (धारा 403(1)) दर्ज करने की तकनीकी भूल के कारण जमानत मिल गई. इसी तर्ज पर, पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में परिस्थितियों के अलावा कोई सीधा चश्मदीद या पुख्ता सीसीटीवी वीडियो पुलिस के पास नहीं है. पुलिस इस डर से डरी हुई है कि यदि उनके दस्तावेजों या धाराओं में जरा सी भी चूक हुई, तो आरोपी सिया गोयल को भी सोनम की तरह ही कानूनी लूपहोल का लाभ मिल जाएगा.
सोनम रघुवंशी केस की तकनीकी चूक (Meghalaya honeymoon murder)
हाल ही में मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर’ केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को कोर्ट से जमानत मिल गई, जिसे हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया. इसका सबसे बड़ा कारण पुलिस द्वारा नई दस्तावेज़ी प्रक्रिया (BNS के तहत) में की गई तकनीकी खामी थी. पुलिस ने सोनम को गिरफ्तार करते समय कागजातों में मर्डर की धारा 103(1) के बजाय धोखाधड़ी की धारा 403(1) को गिरफ्तारी का सही कारण बता दिया था. इसी बड़ी चूक (लूपहोल) का फायदा बचाव पक्ष को मिला और सोनम सलाखों के पीछे से बाहर आ गई.
पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में बढ़ा डर (Ketan Agarwal Murder Case)
सोनम रघुवंशी मामले के इस मोड़ के बाद महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, पुणे पुलिस के मन में भी गहरा डर बैठ गया है. पुणे में हुए केतन अग्रवाल मर्डर केस में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची थी. लेकिन इस मामले में पुलिस के पास कोई भी चश्मदीद गवाह या सीधे तौर पर हत्या को साबित करने वाली सीसीटीवी फुटेज मौजूद नहीं है. पूरी कहानी परिस्थितिजन्य सबूतों पर टिकी है, जिससे पुलिस को डर है कि एक भी तकनीकी गलती सिया गोयल को सोनम की तरह ही बचा लेगी.
साजिश और सबूतों की कशमकश
जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन के बीच पिछले 6 महीनों में 2004 कॉल्स हुई थीं और वे हत्या वाले दिन भी लोहगढ़ किले पर जाने से ठीक पहले एक कैफे में मिले थे. इससे पहले प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए बाली जाने की ट्रिप रद्द कराने के लिए सिया ने केतन का पासपोर्ट वॉशरुम में फेंक दिया था. पुलिस ने डमी पुतले से क्राइम सीन भी रीक्रिएट किया, पर वैज्ञानिक रूप से यह तय करना मुश्किल है कि केतन को धक्का दिया गया या वह खुद फिसला. इसलिए अब पुलिस का पूरा फोकस डिजिटल ट्रेल और अकाट्य सबूतों के साथ एक ‘फूलप्रूफ’ चार्जशीट तैयार करने पर है.
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-भारत एक्सप्रेस
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