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भारत और यूएई के बीच हुए समझौते दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक मजबूती देंगे: पीएम मोदी

भारत और यूएई के बीच ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी और निवेश समेत 7 बड़े समझौते हुए. पीएम मोदी ने इन्हें रिश्तों के लिए अहम बताया.

PM Modi Tweet, Suvendu Adhikari, West Bengal
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच हुए नए समझौते दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देंगे. यूएई की अपनी संक्षिप्त यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया, जहां ऊर्जा, रक्षा, तकनीक, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़े सात बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण रही और इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिलेगी. उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में कई रणनीतिक क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाएगा.

ऊर्जा सुरक्षा पर सबसे बड़ा फोकस

इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा सबसे अहम मुद्दों में शामिल रही. भारत और यूएई के बीच इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता हुआ.

इस समझौते का उद्देश्य भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करना और भविष्य में तेल एवं गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है. इससे वैश्विक संकट या तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के समय भारत को बड़ी राहत मिल सकती है. दोनों देशों ने एलपीजी की लंबी अवधि की सप्लाई को लेकर भी समझौता किया है. सरकार का मानना है कि इससे घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर रखने में मदद मिलेगी.

एलएनजी-एलपीजी को मिलेगा बढ़ावा

भारत और यूएई के बीच एलएनजी और एलपीजी बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह समझौता भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा. ऊर्जा क्षेत्र में यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन संकट और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं.

रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढांचा तैयार करने पर सहमति जताई है. इसके तहत रक्षा निर्माण, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

भारत और यूएई अब केवल आर्थिक साझेदार नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा और सामरिक सहयोग के क्षेत्र में भी एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बदलते हालात के बीच यह रक्षा सहयोग भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है.

गुजरात में बनेगा समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर क्लस्टर

दोनों देशों के बीच गुजरात के वाडिनार में जहाज मरम्मत और समुद्री बुनियादी ढांचा क्लस्टर विकसित करने पर भी सहमति बनी है. सरकार का कहना है कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती मिलेगी और भारत का समुद्री क्षेत्र तेजी से विकसित होगा. इसके अलावा जहाज निर्माण और मरम्मत क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

कौशल विकास पर भी समझौता

भारत और यूएई ने जहाज मरम्मत क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट को लेकर भी समझौता किया है. इसका मकसद भारतीय युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देना और उन्हें वैश्विक स्तर के समुद्री कार्यबल के रूप में तैयार करना है. सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत भविष्य में जहाज निर्माण और मरम्मत के क्षेत्र में एक बड़ा वैश्विक केंद्र बन सकता है.

सुपरकंप्यूटर परियोजना पर सहमति

तकनीकी क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता हुआ है. भारत के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग और यूएई की जी42 कंपनी मिलकर आठ एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्रोसेसिंग और एडवांस रिसर्च के क्षेत्र में भारत की क्षमता को नई ऊंचाई दे सकती है.

5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा

यूएई ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय संस्थानों में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है. इससे भारत के कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को गति मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक विकास को मजबूती देगा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूएई के बीच बढ़ती साझेदारी दोनों देशों की जनता के लिए नए अवसर पैदा करेगी और आने वाले समय में यह संबंध और अधिक मजबूत होंगे.

 



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