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‘गूंगी गुड़िया’ वाले बयान पर एनसीपी का सवाल, क्या कांग्रेस इंदिरा गांधी पर की गई आलोचना को दे रही मान्यता?

सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने मंगलवार को कांग्रेस पर एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर निशाना साधा है. यह पोस्ट महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और अजीत पवार के संदर्भ में किया गया था.

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है. एनसीपी ने कांग्रेस से इस टिप्पणी को वापस लेने की मांग की है और कहा है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं के सम्मान से समझौता नहीं किया जाना चाहिए.

मामला उस समय सामने आया जब कांग्रेस की ओर से एक सोशल मीडिया पोस्ट किया गया, जिसमें सुनेत्रा पवार को लेकर सवाल उठाते हुए कहा गया कि वह आखिर कब तक ‘गूंगी गुड़िया’ बनकर रहेंगी. इस पोस्ट के बाद एनसीपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक बहस के स्तर को गिराता है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस द्वारा इस्तेमाल किया गया यह शब्द पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ अतीत में की गई ऐसी ही टिप्पणियों को सही ठहराने जैसा नहीं है?

इंदिरा गांधी का दिया उदाहरण

उमेश पाटिल ने कहा कि राजनीति में विचारों का विरोध और नीतियों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है. किसी भी दल को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन महिलाओं को निशाना बनाकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता.

उन्होंने इंदिरा गांधी के शुरुआती राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उनके विरोधियों ने भी कई बार उनके खिलाफ इसी तरह की टिप्पणियां की थीं. हालांकि, इंदिरा गांधी ने इन आलोचनाओं का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने काम और फैसलों से दिया.

पाटिल ने कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका जैसे मुद्दों पर इंदिरा गांधी के फैसलों ने उन्हें मजबूत नेता के रूप में पहचान दिलाई. उन्होंने कहा कि समय के साथ उनके राजनीतिक विरोधी भी उनकी नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा करने के लिए मजबूर हुए.

एनसीपी ने कांग्रेस से मांगी टिप्पणी वापस लेने की मांग

एनसीपी नेता ने कहा कि लोकतंत्र में तीखी बहस हो सकती है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की यह टिप्पणी महिलाओं के प्रति सोच को दिखाती है और ऐसी भाषा समाज में गलत संदेश देती है.

उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह अपनी टिप्पणी वापस ले और राजनीतिक संवाद में सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करे.

वहीं, एनसीपी पदाधिकारी सूरज चव्हाण ने भी कांग्रेस पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद को हमेशा एक सभ्य राजनीतिक परंपरा वाली पार्टी बताती रही है, लेकिन मौजूदा समय में उसके नेताओं और सोशल मीडिया पोस्ट में इसका असर दिखाई नहीं देता.

चव्हाण ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात केवल भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि राजनीतिक व्यवहार में भी नजर आनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र कांग्रेस में नेतृत्व कमजोर और बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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